प्रयागराज : कुंभ में देश-विदेश के श्रद्धालु दुर्लभ पांडुलिपियों को भी करीब से देख सकेंगे। राज्य संस्कृति विभाग के शिविर में तुलसीदास रचित रामचरित मानस के कांड, गंगा महात्म्य, माघ स्नान, ध्यान, दान की विधि एवं गंगाष्टक से जुड़े हस्तलेख प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध होंगे। इसमें सर्वाधिक पुरानी पांडुलिपि 861 ईस्वी की बौद्ध धर्म की संस्कृति को प्रदर्शित करती होगी। प्रदर्शनी 10 जनवरी से मेला क्षेत्र में शुरू होगी।

कुंभ के दौरान ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करती दुर्लभ पांडुलिपियां हर किसी के आकर्षण का केंद्र होंगी। शिविर में प्रदशित होने वाली प्रमुख 50 पांडुलिपियां होंगी जो ईस्वी सन 1773 से 1895 के मध्य की होंगी। बौद्ध धर्म से जुड़ी सर्वाधिक पुरानी पांडुलिपि बलि, होम और धार्मिक मत को दर्शाती हुई होगी। इसके अतिरिक्त 1773 ईस्वी की यमुना पूजा भी होगी। रामचरित मानस (बालकांड, लंका कांड) के साथ माघ महात्म्य, त्रिस्थलीय सेतु प्रयाग (प्रयाग शब्द की उत्पत्ति), त्रिस्थलीय सेतु (प्रयाग प्रकरण) की पांडुलिपियां प्रमुख होंगी।

इसके अतिरिक्त गंगा महात्म्य, प्रयाग महात्म्य, गंगा लहरी, गंगा द्वादश नाम स्त्रोत, गंगाधर की आरती, सर्वदान विधि, तीर्थश्राद्, पद्म पुराण, गंगा स्त्रोत, गंगाष्टक (आदित्यपुरी), गंगाष्टक (वाल्मीकि) गंगाष्टक (कालिदास) रामचरित मानस, (अयोध्या कांड), यमुनाष्टक, गोदान विधि, गंगा कवच और शंकराचार्य के गंगाष्टक के भी इस शिविर में दीदार होंगे। अभिलेखागार विभाग में पांडुलिपि अधिकारी गुलाम सरवर ने बताया कि श्रद्धालुओं को कुंभ एवं धर्म के महत्व को दर्शाने के लिए शिविर का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु 10 जनवरी से अंतिम स्नान पर्व तक इन दुर्लभ पांडुलिपियों को देख सकेंगे। 47वां मानस सम्मेलन 16 से :

श्री रामचरित मानस सम्मेलन समिति का 47वां मानस सम्मेलन 16 दिसंबर से श्री पथरचट्टी रामलीला परिसर रामबाग में शुरू हो रहा है। समिति के अध्यक्ष लल्लू लाल गुप्त ने बताया कि 24 दिसंबर तक 'नौ दिन सुनिये राम कथा' का आयोजन किया जा रहा हे।

Posted By: Jagran

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