राजकुमार श्रीवास्तव, इलाहाबाद : विश्व ¨हदू परिषद के लिए यह पहला मौका होगा, जब कुंभ में उसे कई बड़े आयोजन करने हैं और उसके पास उनके सबसे चर्चित चेहरे अशोक सिंहल और डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया नहीं होंगे। ऐसे में यह कमी परिषद को जहां खलेगी, वहीं नई पीढ़ी के नेताओं को खुद को साबित करने का मौका मिलेगा।

इलाहाबाद में पिछले कुंभ के दौरान विहिप की कमान अशोक सिंहल के हाथ में ही थी, इसलिए कुंभ में उनकी गैरमौजूदगी और भी खास होगी। दशकों तक अशोक सिंहल और डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ही विहिप का चेहरा रहे हैं। कुंभ जैसा आयोजन हो या कोई सामान्य सभा, लोग उनको सुनने के लिए जुटते थे। ऐसे में इन दोनों की उपस्थिति सफलता की गारंटी होती थी। अब सिंहल इस दुनिया में नहीं रहे और डॉ. तोगड़िया अब विहिप में नहीं हैं। ऐसे में सारा दायित्व अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे के कंधों पर माना जा रहा है। हालांकि सिंहल के बेहद करीबी रहे चंपतराय का अनुभव उनके बेहद काम आ सकता है। चंपतराय की संतों के बीच गहरी पैठ है, उधर मिलिंद परांडे प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनके साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक और राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश भी इस आयोजन के जरिए अपनी पहचान को पुख्ता कर सकेंगे। मामले में विहिप के महानगर मीडिया प्रभारी अश्वनी मिश्र कहते हैं कि विहिप में संगठन सर्वोपरि है। वही सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए सब कुछ यथावत रहेगा। हालांकि अशोक सिंहल की भरपाई नहीं हो सकती।

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कुंभ में विहिप के मुख्य आयोजन

-27 जनवरी से 13 फरवरी तक वेद विद्यालयों का शिविर

-28 जनवरी से पांच फरवरी तक देशभर के प्रमुख संतों का प्रवास

-30 जनवरी को सांस्कृतिक कुंभ

-31 जनवरी और एक फरवरी को धर्म संसद

-मार्ग दर्शक मंडल की बैठक।

Posted By: Jagran