इलाहाबाद : विर्भित सर्वभूतानि वेदशास्त्र सनातनम्। शास्त्रों ने इसी श्लोक के जरिये सनातन वेदशास्त्र को संपूर्ण भूतों को धारण करने वाला और प्राणियों की उन्नति का सर्वोतम साधन बताया है। यही नहीं वेदवित मनुष्य को सैन्य प्रशासन, राज्य नियंत्रण, न्यायाधीश आदि पद, जड़ और चेतन प्रकृति के संवेदनशील संतुलन के प्रति असाधारण योग्यता वाला भी बताया गया है।

झूंसी स्थित स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय में ऐसे ही वेद पाठियों की नर्सरी तैयार की जाती है। यहां वर्तमान में 75 छात्र वेदशास्त्र की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वेद का ज्ञान प्राप्त कर इस विद्यालय के कई छात्र अन्य वैदिक विद्यालयों में वेदशास्त्र का अध्यापन कर रहे हैं। सात समुंदर पार भी इस विद्यालय के छात्र वेदशास्त्र का ज्ञान फैला रहे हैं।

कौशांबी निवासी करुणाकर मिश्र इस विद्यालय से वेद की शिक्षा ग्रहण कर इस समय आस्ट्रेलिया में वेदशास्त्र का ज्ञान विदेशियों में बांट रहे हैं। उन्हें भारतीय मुद्रा के अनुसार करीब एक लाख मासिक वेतन मिल रहा है। इस वेद विद्यालय की स्थापना श्री परमानंद आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री 1008 स्वामी शारदानंद गिरि महाराज द्वारा 1999 में किया गया था। तब से यह विद्यालय बटुकों को वेद की शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस विद्यालय में उत्तर प्रदेश, असम, नेपाल, उतराचंल व मध्य प्रदेश सहित कई प्रांतों के छात्र वेद की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वेद पाठियों को सफेद धोती और कुर्ता धारण करना पड़ता है। इस विद्यालय में दी जाने वाली वेदभूषण की शिक्षा हाईस्कूल के बराबर होती है। यह पांच साल में पूरा होता है। इसके बाद वेद विभूषण की शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। यह सात साल की होती है। इसकी मान्यता इंटर के बराबर होती है। शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्रों को विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेना पड़ता है। यह डिग्री बीए और एम के बराबर होती है। इस विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए भोजन, आवास और शिक्षा की नि:शुल्क व्यवस्था रहती है। इसका पूरा खर्च मर्हिष सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान उज्जैन व संस्था के द्वारा किया जाता है। वेदशास्त्र के अलावा छात्रों को अंग्रेजी, सामाजिक विषय, गणित, संस्कृत व्याकरण व कम्प्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है। इस विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को वेदपाठ का सस्वर मौखिक उच्चाकरण करना, बाल्यावस्था से वेदपाठ में पारंगत करना और कंप्यूटर में पारंगत करने के साथ योगासन का अभ्यास कराया जाता है। पठन-पाठन के अतिरिक्त सफल एवं गुणी वेद छात्रों को नौकरी की सुविधा भी प्रदान की जाती है। जो छात्र वैदिक शास्त्र में उच्च शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं उन्हें काशी और हरिद्वार जैसे शिक्षा केंद्रों में यथा संभव समुचित व्यवस्था की जाती है।

-ब्रज मोहन पांडेय, प्राचार्य

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