प्रयागराज, जेएनएन। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी यूपीपीएसी में कई परीक्षाओं में लंबे समय तक चला फर्जीवाड़ा सामने आने लगा है। पेपर लीक के साथ अंकों में हेर-फेर के लिए विवादों में रही पीसीएस 2015 परीक्षा एक बार फिर चर्चा में है।

परीक्षा की सीबीआइ जांच में बड़ी अनियमितता सामने आ रही है। ओएमआर शीट जलाने, स्केलिंग व मॉडरेशन प्रक्रिया में अनियमितता के बाद सीबीआइ को इंटरव्यू में गड़बड़ी मिली है। जांच में सीबीआइ को पता चला है कि छह अभ्यर्थियों का चयन कराने के लिए उनके अंक इंटरव्यू के बाद बढ़ाए गए हैं। इंटरव्यू लेने वाले पैनल ने उन्हें जितने अंक दिए थे। उसमें 10 से 25 नंबरों की बढ़ोतरी करके अभ्यर्थियों को पास किया गया। सीबीआइ ऐसा करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही उन छह अभ्यर्थियों को तलब करने की तैयारी है।

उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने 29 मार्च 2015 को पीसीएस प्री 2015 की परीक्षा कराई थी, प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान लखनऊ में पेपर लीक हो गया। लखनऊ के कृष्णानगर थाना में एसटीएफ ने पेपर लीक होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पेपर लीक होने पर 30 मार्च को अभ्यर्थियों ने लोकसेवा आयोग पर उग्र प्रदर्शन किया। इसके बाद दबाव बढऩे आयोग ने प्री परीक्षा निरस्त करके 10 मई 2015 को दोबारा परीक्षा कराई थी। उसमें पांच लाख के लगभग अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

नष्ट हुई दो लाख से अधिक ओएमआर शीट

सीबीआइ 25 जनवरी 2018 से यूपीपीएसससी की 550 भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है। पीसीएस 2015 की जांच एक वर्ष से चल रही है। जांच की शुरुआत में सीबीआइ को स्केलिंग व मॉडरेशन प्रक्रिया के जरिए अंकों में हेर-फेर करने की जानकारी मिली। आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक से जून 2019 से लगातार पूछताछ चल रही है। इधर, पिछले माह सीबीआइ ने विदेश में रह रहे आयोग के एक पूर्व अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाया था। इसमें दो लाख से अधिक ओएमआर शीट के नष्ट होने व इंटरव्यू के बाद नंबर बढ़ाने की जानकारी मिली। सीबीआइ जल्द ही पूर्व परीक्षा नियंत्रक व विदेश से बुलाए गए अधिकारी का आमना सामना कराएगी। उन्हें उन अधिकारियों व कर्मचारियों से भी मिलवाया जाएगा, जो उनके निर्णय को जमीनीस्तर पर लागू करते थे और मौजूदा समय में आयोग में कार्यरत हैं।

प्रदेश के 2488 पीसीएस अफसर सीबीआई के रडार पर हैं। यह वे अफसर हैं जिनका चयन सपा शासनकाल के दौरान हुई लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2011 से 2015 तक की पांच भर्तियों में किया गया। सीबीआई इन भर्तियों में चयनित अफसरों से भी पूछताछ कर सकती है। पीसीएस 2011 से 2015 तक की परीक्षाओं में चयनित 2488 अफसरों में 184 डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम और 200 डिप्टी एसपी शामिल हैं। चयनित अफसर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात हैं। यूं तो सीबीआई एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच हुई आयोग की सभी भर्तियों की जांच करेगी पर इसमें पीसीएस परीक्षा सबसे अहम होगी क्योंकि सबसे ज्यादा विवाद पीसीएस भर्ती को लेकर ही रहा। सूबे में प्रशासनिक सेवा की यह सर्वोच्च भर्ती होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर भर्तियों की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। इसके बाद से ही पीसीएस में चयनित इन 2488 अफसरों समेत अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच आयोग की विभिन्न भर्तियों में चयनित सभी अभ्यर्थियों की बेचैनी बढ़ गई है।

पीसीएस परीक्षा 2015

कुल पद : 530 (एसडीएम के 22 पद)

  • 29 मार्च 2015 : प्री परीक्षा हुई, प्रथम पाली का पेपर लीक हुआ। फिर भी दूसरी पाली की परीक्षा कराई गई।
  • 10 मई 2015 : दोबारा प्रारंभिक परीक्षा कराई गई।
  • छह जून 2015 : प्री परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ। मुख्य परीक्षा के लिए 9164 अभ्यर्थी सफल।
  • 29 जून से 16 जुलाई 2015 : मुख्य परीक्षा हुई।
  • एक दिसंबर 2015 : मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ। इंटरव्यू के लिए 1578 अभ्यर्थी सफल हुए।
  • 22 जनवरी से 24 फरवरी 2016 : इंटरव्यू चला।
  • एक मार्च 2016 : अंतिम रिजल्ट घोषित। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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