प्रयागराज, जेएनएन। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा का सफलता प्रतिशत शानदार है। कालेज प्रबंधन व अभिभावक जहां छात्र-छात्राओं के रिजल्ट से फूले नहीं समा रहे हैं, वहीं प्रदेश में 165 ऐसे कालेज हैं, जिनका रिजल्ट शून्य है। ये ऐसे कालेज हैं जिन्होंने बाकायदे माध्यमिक शिक्षा परिषद से हाईस्कूल व इंटर स्तर की मान्यता ले रखी है लेकिन, छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और परिणाम से उनका कोई सरोकार नहीं है। एक तरह से शिक्षा के नाम पर खुली इन दुकानों में बड़े-बड़े बोर्ड जरूर लगे हैं लेकिन, उसके सापेक्ष न तो वहां छात्र-छात्राओं का दाखिला हो रहा है और न ही पढ़ाई।

यूपी बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट की मानें तो हाईस्कूल स्तर के 96 और इंटर स्तर के 69 सहित कुल 165 कालेज ऐसे हैं, जिनका परिणाम शून्य है। यानी उनके यहां के छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए लेकिन, वे उत्तीर्ण नहीं हो सके। हालांकि इन कालेजों में दाखिला लेने वाले और परीक्षा में शामिल होने वालों की तादाद अंगुलियों की गिनी जा सकती है।

ऐसे में सवाल है कि जब छात्र-छात्राएं दाखिला नहीं ले रही और रिजल्ट का यह हाल है तो इनकी मान्यता कैसे चल रही है? इससे भी बड़ी सूचना यह है कि शून्य रिजल्ट देने वाले तमाम कालेज उस प्रयागराज जिले में ही संचालित हैं, जहां यूपी बोर्ड का मुख्यालय है। मुख्यालय के आसपास के जिले कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, मीरजापुर, भदोही में भी ऐसे कालेजों की भरमार है।

बोर्ड के आकड़ों के अनुसार हाईस्कूल स्तर में कौशांबी में 13, प्रयागराज में सात, मीरजापुर व इटावा में छह-छह, बलिया व गाजीपुर में पांच-पांच, चित्रकूट व प्रतापगढ़ में तीन-तीन कालेज चल रहे हैं। इसी तरह से इंटर स्तर में मैनपुरी व अलीगढ़ में सात-सात, प्रतापगढ़ व गाजीपुर में पांच-पांच, आजमगढ़ में चार और प्रयागराज में तीन कालेज संचालित हैं। शून्य रिजल्ट देने वाले एक व दो कालेजों वाले जिलों की संख्या पूरब से पश्चिम तक काफी अधिक है।

Edited By: Umesh Tiwari