प्रयागराज, जेएनएन। रीयल एस्टेट कारोबारी को लखनऊ से अगवा करने के बाद देवरिया जेल में पीटने के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद के पुत्र मोहम्मद उमर फिलहाल फरार है। उमर की फरारी पर अतीक के करीबियों और समर्थकों में चर्चा होती रही कि क्या उमर भी जेल जाने से बचने के लिए अपने चाचा पूर्व विधायक अशरफ की तरह बरसों तक फरारी काटेगा। मगर करीबियों का कहना है कि वह अपराधी नहीं है इसलिए भागेगा नहीं। कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा। चाचा अशरफ से उसकी तुलना न की जाए।

सीबीआइ छापेमारी की जताई जा रही संभावना
उमर को सीबीआइ अब तक नहीं खोज सकी है। उमर के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने के बाद सीबीआइ द्वारा यहां चकिया स्थित निवास में छापेमारी की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल अभी तक टीम नहीं आई है।

विधायक राजू पाल हत्‍याकांड के बाद गिरफ्तार फिर जमानत पर छूटा था अशरफ
अतीक का छोटा भाई शहर पश्चिमी का पूर्व विधायक अशरफ लंबे समय तक फरारी काटता रहा है। जनवरी 2005 में शहर पश्चिमी के बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के कुछ वक्त बाद अशरफ को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था। साल भर बाद वह जमानत पर छूटा।

गवाह को अगवा कर धमकाने पर केस दर्ज होने के बाद है फरार
वर्ष 2007 में बसपा शासन आने पर राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को अगवा कर धमकाने का केस दर्ज हुआ तो वह फिर भाग गया। इसके बाद अशरफ चार साल तक फरार रहा। पुलिस ने बहुत कोशिश की, घर में कुर्की भी डाली गई लेकिन वह मिला नहीं। अशरफ पर एक लाख रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था। आखिरकार एक मई 2011 को उसे नोएडा के कासना इलाके में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया। राज्य में बसपा शासन आने पर अतीक कुछ महीने बाद दिल्ली में गिरफ्तार हो गए थे मगर अशरफ ने चार साल से ज्यादा वक्त तक फरारी काटी थी। गिरफ्तारी के बाद वह कुछ महीने बाद जमानत पर रिहा हुआ था।

प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद से फरार है अशरफ
2017 में प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार आने के बाद से अशरफ फरार है। अशरफ झलवा में सूरजकली और उनके बेटे पर जानलेवा हमले की घटना में वांछित है। अतीक अहमदाबाद जेल में बंद हैं। अब उनके बेटे उमर पर भी कानूनी शिकंजा कस गया है। परिवार का कहना है कि उमर ने जुलाई के पहले हफ्ते में नोएडा के एमिटी में कानून के पांच वर्षीय पाठ्यक्रम की परीक्षा दी है।

बोले अतीक के अधिवक्‍ता, इस मामले में उमर को बेवजह फंसाया गया है
अतीक के अधिवक्ता खान शौलत हनीफ का कहना है कि उमर कोई अपराधी नहीं है। देवरिया जेल कांड के वक्त भी वह पिता से मिलने गया था बस। इस मामले में उमर को बेवजह फंसाया गया है। अधिवक्ता के मुताबिक, सीबीआइ की कोई टीम शुक्रवार शाम तक नहीं आई।

बेटे पर 21 की उम्र में पहला केस
10 अगस्त 1962 को जन्मे अतीक अहमद पर पहला मुकदमा 1979 में हत्या का दर्ज हुआ था। यानी 17 साल की उम्र में नाबालिग अतीक पर पहला मुकदमा वो भी संगीन। अब बेटे उमर पर 21 साल की उम्र में मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके बारे में घरवालों का कहना है कि यह फर्जी केस है। वह पिता के नक्शे कदम पर नहीं चल रहा है। सेंट जोसेफ कॉलेज का मेधावी छात्र रहा है और कानून की पढ़ाई कर रहा है।

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