प्रयागराज, जेएनएन। आजमगढ़ में करीब 10 साल पहले हुए कत्ल के मुकदमे में बसपा के पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम समेत तीन अभियुक्तों को एमपी एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश डॉ. बालमुकुंद की कोर्ट ने अभियुक्तों को केंद्रीय कारागार नैनी भेजने का आदेश देते हुए सजा पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तिथि नियत की है।

गोली मारकर फौजदार पासवान की हत्या कर दी गई थी

आजमगढ़ के सराय मीर थाने में लालता प्रसाद पासवान ने 27 नवंबर 2010 को मुकदमा दर्ज कराया था कि वह सुबह करीब 10 बजे बाइक पर बाजार जा रहे थे। पीछे दूसरी बाइक पर उनका भाई फौजदार पासवान और महेंद्र आ रहे थे। इसरौली बाजार के पास पहुंचे, तभी बाइक पर पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम और शिवकुमार समेत तीन लोग आ गए। हीरालाल ने ललकारा कि आज फौजदार की राजनीति का अंत कर दो। इसके बाद गोली मारकर फौजदार पासवान की हत्या कर दी गई।

20 जनवरी को सजा के लिए सुनवाई पर दोनों पक्ष अपनी बात रखेंगे

अभियोजन अधिकारी जय गोविंद उपाध्याय ने गवाह पेश कर आरोप को सिद्ध किया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में नामजद किया गया है। कोर्ट में चली सुनवाई में रोशनलाल को भी कत्ल में शामिल पाया गया लेकिन उसके खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हो सका। उसे दोषमुक्त कर दिया गया। पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम समेत इंद्रभान उर्फ इंदू तथा शिवकुमार को हत्या में दोषी करार देते हुए नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया। 20 जनवरी को सजा के लिए सुनवाई पर दोनों पक्ष अपनी बात रखेंगे।

पुलिस चौकी के पास बम धमाका, आरोपी पुलिस पकड़ से दूर

ईश्वर शरण चौकी के पास गुरुवार की देर रात धमाका हुआ था। आरोप था कि रंजिशन पान की गुमटी पर बम फेंका गया था। चौकी प्रभारी मनोज यादव का कहना था कि धमाका सुनकर वह गुमटी के पास गए थे लेकिन न तो बम के अवशेष मिले न कोई फेंकने वाला। ऐसे में शक है कि किसी गाड़ी का टायर फटा होगा। हालांकि सुबह आपसी रंजिश के कारण एक पक्ष ने चौकी में आकर कहा कि गुमटी पर बम हमला हुआ था। आरोपित फरार है, पुलिस पकडऩे का प्रयास कर रही है।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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