प्रयागराज, जेएनएन। दीपावली पर्व पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ ही काली पूजा का भी विधान है। परंपरा के तहत रविवार को शहर के तमाम इलाकों में पंडालों में मां काली की प्रतिमा को स्थापित कर विधिवत पूजजन-अर्चन किया जा रहा है। आधी रात तक मां की प्रतिमा के समक्ष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इसके बाद मुख्य पूजन और फिर प्रसाद वितरण होगा। वहीं पूजा पंडालों में स्थापित की गईं मां काली की प्रतिमा को भक्त कहां विसर्जित करेंगे, इसकी अभी तक कोई व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। ऐसे में पूजा कमेटियों के मन में संशय है।

मूर्ति विसर्जन स्थल तय न होने से भक्तों में नाराजगी

मूर्ति विसर्जन सोमवार को कहां होगा इसको लेकर दुविधा की स्थिति है। प्रशासन की ओर से कहीं विसर्जन स्थल न बनाए जाने से बंगाली समाज में नाराजगी भी है। बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव डॉ पीके राय के अनुसार शहर में करीब 45 स्थानों पर दीपावली के दिन काली पूजा होती है। कुछ लोग मां काली के चित्र को रखकर पूजा करते हैं। अधिकांश लोग मूर्तियां बनवाकर पूजते हैं। छोटी-बड़ी करीब 30 से अधिक मूर्तियां हो जाती हैं। सोमवार को इनका विसर्जन किया जाना है लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कृत्रिम तालाब की व्यवस्था नहीं की है।

दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद अस्थायी तालाब खत्म हो गया है

बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव डॉ. पीके राय ने कहा कि गंगा यमुना में आई बाढ़ के चलते इस बार कृत्रिम तालाब नहीं बनाया गया। झूंसी में अंदावा के निकट कृत्रिम तालाब बनाकर वहां मां दुर्गा की मूर्तियां विसर्जित कराई गई थीं। इसके बाद वह तालाब भी खत्म कर दिया गया। मां काली की प्रतिमा विसर्जन के लिए अब कोई स्थान नहीं बचा। नदियों में मूर्ति विसर्जन करने पर प्रतिबंध है। कहा कि जिला प्रशासन ने पहले से कोई इंतजाम नहीं किया जिससे बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन और इसके सदस्यों के सामने बड़ी दुविधा है।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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