प्रयागराज: यह कुंभ अद्भुत है। इस पर दुनिया भर की निगाह है। ऐसे में  संगम तट से स्वच्छता, समरसता और सद्भावना का संदेश जाना चाहिए। इसके लिए सबको एकजुट प्रयास करना चाहिए। इसमें सबसे बड़ा दायित्व कलम के सिपाहियों का है। कुंभ को इसी तरह से देखें ताकि इसे विश्व को दिखा सकें। तीर्थों के राजा प्रयाग की इस धरती से टूटे दिलों को जोडऩे का काम होना चाहिए।यह बातें अरैल मेला क्षेत्र स्थित शिविर में परमार्थ निकेतन ऋषिकेष के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि जी ने पत्रकारों से कहीं।

 स्‍वामी चिदानंद ने बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक देश से 42 फीसद पेयजल समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पानी की शुद्धता को बचाने का समग्र प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे अच्छा साधन पौधरोपण है। इससे पानी की शुद्धता भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि श्मशान घाटों पर आस्था और अस्थि का संगम होना चाहिए। अंतिम संस्कार के दौरान पेड़ की लकड़ी नहीं बल्कि गोबर की कंडी (उपली) का प्रयोग होना चाहिए। इससे वायु प्रदूषण भी दूर होगा और पेड़ों की कटाई पर भी अंकुश लगेगा। घाटों पर शवदाह गृह होना चाहिए, जहां लोग अंतिम संस्कार करें और वहीं एक पेड़ लगाकर जाएं। इस स्थान को प्रिय उपवन कहा जाना चाहिए।

 बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार की सरकारों से मांग की है कि स्वच्छता को कक्षा एक से पांच तक विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल कर अनिवार्य किया जाना चाहिये। इससे जागरूकता बढ़ेगी। स्वच्छता से ही समृद्धि भी आती है, मन भी प्रसन्न रहता है।

19 फरवरी तक चलेगा विविध कार्यक्रम

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया कि अरैल स्थित परमार्थ निकेतन शिविर में तीन दिवसीय कुंभ फोटोग्राफी, 16 जनवरी से तीन दिवसीय कुंभ में गांधीवाद पुनरुत्थान सम्मेलन होगा, जिसका उद्घाटन 17 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे। 27 से तीन दिवसीय शक्ति कुंभ शिखर सम्मेलन होगा। 31 जनवरी से 7 फरवरी तक योग कुंभ का आयोजन किया जायेगा, जिसका उद्घाटन योगगुरु बाबा रामदेव करेंगे। 5 से 11 फरवरी तक श्रीमद् भागवत कथा, 13 से 18 फरवरी तक अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन किया जायेगा। 14 से 22 फरवरी तक संत मुरलीधर द्वारा हरिकथा कही जाएगी। 14 से 19 फरवरी तक कीवा कुंभ मेला महोत्सव मनाया जाएगा।

Posted By: Brijesh Srivastava

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