जागरण संवाददाता, प्रयागराज : शरद पूर्णिमा रविवार को है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा, धरती पर अमृत बरसायेगा। इसी दिन माता लक्ष्मी की पूजा होगी और खीर बनाकर उसे रात भर खुले आसमान के नीचे रखने और सुबह प्रसाद के रूप में वितरित करने की परंपरा है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण है। इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। आश्रि्वन मास शुक्ल पक्ष की यह पूर्णिमा अस्थमा के रोग निदान और इसकी औषधि वितरण के लिए भी श्रेष्ठ समय मानी जाती है।

ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय ने बताया है कि शरद पूर्णिमा को अमृतमयी चांदनी में खीर बनाकर अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को खिलाने से उसे लाभ मिलता है। आयुर्वेद के साथ जब ज्योतिष विज्ञान के मुहूर्त का समन्वय होता है तो यह मनुष्य के लिए विशेष कल्याणकारी सिद्ध होता है। नेत्र रोग से पीड़ित व्यक्ति को शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में सुई में धागा डालने का प्रयोग कई बार दोहरवाया जाता है। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है। इसके अलावा माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ की कामना के लिए व्रत उपवास रख भगवान से प्रार्थना करती हैं।

यह करें तो लाभदायक होगा

-'ओम् चंद्रमसे नम:' मंत्र का कम से कम 11 बार उच्चारण करें या 108 के क्रम में जप करें।

-चांदी के दीप में शुद्ध घी की बाती से चंद्रमा की आरती उतारें।

-पूर्णिमा के दिन संध्याकाल से चंद्रोदय के समय चांदी या तांबे के लोटे में जल भरकर अ‌र्घ्य दें और अपने स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करें।

यह रहेगा शुभ मुहूर्त

शनिवार रात 12.05 बजे से तिथि का प्रारंभ

रविवार रात 1.58 बजे तक रहेगी पूर्णिमा

रविवार शाम 5.56 बजे चंद्रोदय

रविवार रात 12 से दो बजे तक अमृतकाल।

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