अमरीश शुक्ल, प्रयागराज : हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने सूचना में सेंधमारी के खतरों से पार पाने के लिए महत्वपूर्ण शोध किया है। इसे 'मास्किंग' नाम दिया गया है। इसके तहत क्वांटम इन्फॉरमेशन को सिस्टम से न तो डिलीट किया जा सकेगा और न ही उसका दुरुपयोग हो पाएगा। अभी तक क्लासिकल इन्फारमेशन के आधार पर पासवर्ड तैयार होते रहे हैं। शोध के माध्यम से वैज्ञानिकों ने सूचनाओं को छिपाने की वैकल्पिक विधि खोज ली है। अब सूचनाओं को क्वांटम को-रिलेशंस के माध्यम से दो या दो से अधिक सिस्टम में रखा जा सकेगा।

क्वांटम कंप्यूटर तैयार करने पर शोध चल रहा है

शोध टीम की अगुवाई करने वाले हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो. अरुण कुमार पति ने बताया कि पूरी दुनिया में क्वांटम मैकेनिक्स के आधार पर क्वांटम कंप्यूटर तैयार करने पर शोध चल रहा है। फिलहाल अभी तक कोई भी देश क्वांटम मैकेनिक्स के आधार पर क्वांटम कंप्यूटर नहीं तैयार कर सका है। दुनिया में जो भी कंप्यूटर हैं वो क्लासिकल मैकेनिक्स के आधार पर तैयार हुए हैं। इसमें सुपर कंप्यूटर भी शामिल है।

...तो क्वांटम कंप्यूटर चीन तैयार कर सकता है

हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो. अरुण कुमार पति के अनुसार आशंका है कि चीन जैसा कोई देश क्वांटम कंप्यूटर तैयार कर सकता है। अगर कोई देश ऐसा करने में कामयाब हो गया तो आसानी से क्लासिकल इन्फारमेशन के आधार पर तैयार सभी प्रकार के पासवर्ड को डीकोड कर देगा। इससे किसी भी देश के सूचना तंत्र में सेंधमारी आसान हो जाएगी। ऐसी आशंकाओं के मद्देनजर भारत सरकार की मदद से देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में क्वांटम इन्फारमेशन पर शोध चल रहा है। हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट में चल रहा शोध भी इसका हिस्सा है।

मास्किंग के माध्यम से सूचनाएं डिलीट नहीं होंगी

शोध टीम में शामिल शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड से सम्मानित हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट की भौतिक शास्त्री प्रो. अदिति सेन डे ने बताया कि मास्किंग के माध्यम से सूचनाओं को सभी नहीं देख पाएंगे और न ही इसे डिलीट किया जा सकेगा। पूर्व के शोध से पता चला था कि क्लासिकल इन्फॉरमेशन को आसानी से डीकोड किया जा सकता है पर क्वांटम इन्फॉरमेशन से तैयार पासवर्ड को डीकोड नहीं किया जा सकेगा। साथ क्वांटम इन्फारमेशन को क्लासिकल इन्फारमेशन की अपेक्षा कई सौ गुना गति से कहीं भी भेजा जा सकेगा।

अभेद्य नहीं है क्लासिकल इन्फारमेशन

रिसर्च टीम में शामिल हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो. उज्ज्वल सेन के अनुसार वैज्ञानिक क्लासिकल इन्फारमेशन को अभेद्य नहीं मानते। वैसे अभी इसी थ्योरी के आधार पर बैंकिंग क्षेत्र आदि में काम हो रहा है पर कई बार इसका दुरुपयोग भी हो जाता है।

Posted By: Brijesh Srivastava