प्रयागराज : परमार्थ निकेतन शिविर अरैल में शुक्रवार को परमार्थ निकेतन और गंगा टास्क फोर्स ने गंगा संरक्षण हेतु एक दिवसीय कार्यशाला की। इसमें गंगा की अविरलता, निर्मलता और जलीय जीवन के संरक्षण का संदेश दिया गया।

   कार्यशाला को संबोधित करते हुए परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि जी महाराज ने कहा कि गंगा संरक्षण हेतु सेना के जवानों ने गंगा टास्क फोर्स बटालियन बनाई है। उनकी स्वच्छ भारत के प्रति निष्ठा देखकर मुझे अपार प्रसन्नता होती है। मैने स्वयं देखा है और सेना के साथ मिलकर गंगा के किनारों पर पौधरोपण का कार्य भी किया है। आज के युग में नदियों के तट पर पौधरोपण करने से बड़ा कोई कार्य नहीं हो सकता है। गंगा को बचाना है तो पौधे लगाने होंगे। यदि धरा को बचाना है तो हम सभी को मिट्टी में मिलकर कार्य करना होगा। आगे कहा कि माटी तभी बचेगी जब हम बहते हुये जल से कटान को रोक सकें। यह कार्य पेड़ बखूबी करते हैैं। इसलिए सभी को मिलकर नदियों, पर्यावरण और जल को बचाने का संकल्प लेना है। जल और मिट्टी को बचाने के लिए गंगा किनारे-किनारे पौधे रोपे जाएं। इस कार्य में जब सेना जुट जायेगी, तो इस क्षेत्र का कोई काम असंभव नहीं है।

   स्वामी जी ने सेना के जवानों की गंगा टास्क फोर्स का अभिनंदन किया। कहा कि सेना की टीम थीम और ड्रीम के साथ चलती है। अब समय आ गया है कि सेना के साथ पूरा समाज मिलकर यह काम करे। टास्क फोर्स प्रमुख मेजर घनश्याम ने कहा कि ऐतिहासिक मेलों की भव्यता, दिव्यता और प्रसिद्धि सब गंगा की वजह से है। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, मेजर घनश्याम, कैप्टन मयंक खोसला, जवानों और गुरुकुल के अनेक ऋषि कुमारों ने हाथ में पौध लेकर गंगा के तटों पर पौधरोपण का संकल्प लिया। फिर विश्वशांति एवं स्वच्छ जलापूर्ति के लिये परमार्थ निकेतन की नवोदित परंपरा वॉटर ब्लेसिंग सेरेमनी संपन्न की।

Posted By: Brijesh Srivastava

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