प्रयागराज, [अमलेंदु त्रिपाठी]। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य वर्तमान में प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह पिछड़ों के बड़े नेता माने जाने लगे हैं। 52 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके केशव प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा के लिए भी यह चुनाव खास है। पार्टी पिछले प्रदर्शन को दोहरा कर 2024 के लिए मजबूत आधार रखना चाहेगी तो केशव उसके विजय रथ के सारथी बनना चाहेंगे। विधानसभा चुनाव 2022 में उन्हें कौशांबी जनपद की सिराथू विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। यह फैसला क्षेत्र की अन्‍य सीटों पर कितना प्रभावी होगा, यह भविष्‍य बताएगा।

जमीनी नेता कहे जाते हैं केशव प्रसाद मौर्य

आज केशव प्रसाद मौर्य के जीवन वृत्त पर गौर करें तो वह जमीनी नेता कहे जा सकते हैं। कहते हैं उनके पीछे काेई बड़ा परिवार या घराना नहीं है, बल्कि आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं वह सब राम की मर्जी है। वह कभी चाय की दुकान चलाते थे। सुबह अखबार भी बांटते थे। उसी दौर में राम मंदिर आंदोलन चला। धीरे-धीरे वह उसका हिस्सा बन गए। यहीं से राम की कृपा उन पर शुरू हो गई। उनकी मुलाकात विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल से हुई। श्री राम मंदिर आंदोलन में भागीदारी बढ़ने के साथ उन्हें संगठन की तरफ से जिम्मेदारी भी दी जाने लगी। उसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। 1992 तथा 1993 में कारसेवकों की भी खूब मदद की। इस बीच राजनीतिक गलियारे में उनकी पहचान बनती रही और आज वह डिप्टी सीएम के पद पर आसीन हैं।

केशव का शाक्य वंश से है संबंध

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सफलता विरासत में नहीं मिली। उन्होंने खुद रास्ता बनाया। केशव का जन्म 7 मई 1969 को कौशांबी जनपद के सिराथू में हुआ था। शाक्य वंश के साधारण से मौर्य परिवार से संबंध रखने वाले केशव ने बचपन में तमाम संघर्षों को भी जिया है। पिता श्याम लाल व माता धनपत्ती देवी खेती कर परिवार का गुजारा करती थीं।

कौशांबी के सिराथू में हुआ था जन्म

केशव प्रसाद मौर्य तीन भाई व तीन बहन हैं। उन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिराथू से ग्रहण की। दसवीं व बारहवीं की शिक्षा दुर्गा देवी इंटर कालेज ओसा मंझनपुर से की थी। आगे चलकर उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन से साहित्य रत्न की भी डिग्री हासिल की। उनका जन्मस्थान कौशांबी का सिराथू है।

चाय की दुकान चलाने के साथ बांटते थे अखबार

केशव प्रसाद मौर्य ने परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए स्कूल के दिनों में ही सिराथू तहसील के पास चाय की दुकान लगा ली थी। इसके साथ ही वह हर सुबह अखबार भी बांटते। दिन में पूरा समय उसी चाय की दुकान पर गुजरता था। यह उनकी और परिवार की जरूरत पूरी करने के लिए जरूरी भी था, सो पूरे मनोयोग से वह इस कार्य को करते थे। भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी बताते हैं कि इन्हीं दिनों उनकी मुलाकात विश्व हिंद परिषद से जुड़े कुछ लोगों से हुई। इसके बाद से वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी जुड़ गए। धीरे-धीरे संघ की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने संगठन के कार्यों में रुचि लेना शुरू कर दिया। बाद में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल से भी उनकी मुलाकात हुई। यहीं से उनके भीतर दबे प्रखर राष्ट्रवाद को और हवा मिली। उन्हें अलग अलग दायित्व भी दिए जाने लगे। धीरे धीरे वह राजनीति की ओर भी बढ़ने लगे।

Edited By: Brijesh Srivastava