इलाहाबाद (जेएनएन)। अधीनस्थ न्यायालयों में सिविल जजों की कमी के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी पीसीएस जे परीक्षा 2018 की शुरुआत नहीं हो पा रही है। छह सौ से अधिक पदों का अधियाचन अगस्त माह में ही अंतिम रूप से उप्र लोकसेवा आयोग यानी यूपीपीएससी को मिल चुका है। विज्ञापन भी काफी पहले से तैयार है। कुछ बिंदुओं पर प्रदेश शासन की मंजूरी न मिलने को देरी का कारण बताया जा रहा है तो परीक्षा की तैयारी के संबंध में हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर यूपीपीएससी को अद्यतन स्थिति भी बतानी है। 

यूपीपीएससी की मानें तो परीक्षा का नोटीफिकेशन जारी करने में शासन से हरी झंडी मिलने का ही इंतजार है। तीन अहम बिंदुओं पर मंजूरी मांगी गई है जिसमें लैंड लॉ को समाप्त कर रेवेन्यू लॉ लागू होने की बड़ी अड़चन है। परीक्षा के लिए आवेदन मांगने से पहले इसकी औपचारिकता पूरी होनी है। यूपीपीएससी ने सितंबर के पहले सप्ताह में नोटीफिकेशन जारी करने की तैयारी का दावा किया था, जिसमें देरी होने से अब 15 सितंबर के बाद विज्ञापन जारी होने के आसार हैं। इस बार सिविल जजों के रिक्त पदों की संख्या छह सौ से अधिक होने के चलते अभ्यर्थियों को विज्ञापन जारी होने का बेसब्री से इंतजार है। सूत्रों का दावा है कि अब तक के सर्वाधिक पदों पर होने जा रही परीक्षा के चलते सैकड़ों मांग पत्र प्रदेश शासन के पास अभ्यर्थियों की ओर से भेजे गए हैं जिनमें चार अवसर की सीमा पूरी होने के बाद कम से कम एक अतिरिक्त अवसर दिए जाने की प्रमुख मांग है। इस पर भी कोई अहम निर्णय होने की संभावना है।

यूपीपीएससी सचिव जगदीश का कहना है कि तैयारी अगस्त में ही पूरी हो चुकी है। शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है। हाईकोर्ट की ओर से भी मांगी गई जानकारी दी जाएगी, इसके बाद विज्ञापन जारी किया जाएगा। चार अवसर के बाद वालों को अतिरिक्त अवसर के संबंध में यूपीपीएससी का कहना है कि उसे सिर्फ परीक्षा करानी है निर्णय शासन को लेना है।

Posted By: Nawal Mishra