कुंभनगर, सद्गुरु शरण। सिर पर गठरियां कुंभ की परंपरा की मोहक लोकपक्ष हैं। इस बार भी संगम की ओर बढ़ते लाखों श्रद्धालु इस परंपरा को उत्साहपूर्वक निभाते दिख रहे हैं, पर कुंभ में पहली बार कंधों के सहारे पीठ पर बैग 'बैकपैक' लटकाए युवाओं की टोलियां उन सारे सवालों के जवाब दे रही हैं। जिनमें नौजवानों की परंपराओं के प्रति अनास्था पर चिंता जताई जाती है। अभी-अभी बालिग हुई पीढ़ी जिस उमंग के साथ इस कुंभ में शामिल है, वह इस बहुचर्चित आयोजन का बेहद उज्ज्वल पहलू है। बहरहाल, इस पीढ़ी के अपने तरीके हैं जो कुंभ को कई अवैज्ञानिक धारणाओं और बंदिशों से बाहर निकालने को प्रेरित भी कर रहे। नौजवान लड़के-लड़कियां अपने अभिभावकों जैसी श्रद्धा के साथ ही संगम पर डुबकी लगा रहे, पर संगम के घाट पर सिर्फ स्नान-ध्यान के बजाय गंगा प्रदूषण और क्राउड मैनेजमेंट पर भी बात करते हैं। श्रद्धालुओं की नई पीढ़ी पाकर संगम भी आह्लादित है।

वाराणसी के एक प्रबंधन संस्थान के तीन छात्रों और तीन छात्राओं की बिंदास टोली संगम पर नौका विहार करके घाट पर लौटी है। उन्हें यहां आकर उम्मीद से ज्यादा आनंद मिला। इनमें एक छात्रा शालिनी लगभग चहकते हुए बताती हैं कि यहां सब कुछ हमारी कल्पना से परे है। सब पहली बार संगम आए। यहां के इंतजाम पर मोहित यह टोली साइबेरियन पक्षियों और नौकाओं की श्रृंखला के साथ अनंत जलराशि की पृष्ठभूमि में सेल्फी बनाकर रोमांचित सी है। वास्तव में यह वो पीढ़ी है जो परंपरा को ज्यादा वैज्ञानिक ढंग से समझती है। शायद इसीलिए इस टोली में शामिल अजहर ने अपने दोस्तों के साथ न सिर्फ संगम में डुबकी लगाई बल्कि माथे पर चंदन का तिलक भी लगवाया। अब ये सब बड़े हनुमान जी के दर्शन करने जा रहे। देर रात तक कुंभनगर में ही रहने का प्लान है।

धूप खिली तो घाटों पर भीड़ उमड़ पड़ी

कुंभनगर पर मौनी अमावस्या का खुमार सवार है। प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या की दृष्टि रिकॉर्ड तोड़ शाही स्नान के निॢवघ्न संपन्न होने से खुश है, पर उम्मीद के विपरीत श्रद्धालुओं का हुजूम न थमने से थोड़ी बेचैनी भी है। संगम के घाट भोर से लेकर देर रात तक गुलजार हैं। मौसम इतना अच्छा है कि डुबकियों से दिल नहीं भरता। दिन में धूप खिली तो घाटों पर भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार होने की वजह से बड़े हनुमान जी के दरबार में बहुत लंबी लाइन लगी है, पर किसी को जल्दी नहीं। दर्शन करने के बाद लोग नाव लेकर उस पार जा रहे जहां सेल्फी प्वाइंट आकर्षक पड़ाव है। जिनके पास अभी भी समय है, वे अखाड़ों की झलक लेने का मोह नहीं छोड़ पा रहे। खासकर जूना अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा खास आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। इस कुंभ ने किन्नरों के प्रति समाज की धारणा बदलने में मील के पत्थर की भूमिका निभाई है। कई साल पहले सेलिब्रिटी बन चुके लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अब संत परंपरा का हिस्सा बन चुके हैं।

 

सोमवार को किन्नर अखाड़े का स्नान देखने के लिए लाखों श्रद्धालु घंटों संगम पर खड़े रहे थे। कल जिनका दिल नहीं भरा, वे आज उनके अखाड़े के चक्कर काट रहे हैं। शाम हो गई। कुंभनगर, खासकर संगम के घाट रुपहली रोशनी से जगमगा रहे हैं। श्रद्धालु अब भी आ रहे हैं। दिन के मुकाबले ठंड बढ़ गई, पर डुबकियां लगाने का सिलसिला जारी है। देवरिया के सिद्धार्थमणि त्रिपाठी पत्नी और बेटा-बेटी के साथ आए हैं। परिवार दिन में ही संगम पर स्नान कर चुका, पर बच्चे फिर डुबकी लगाना चाहते हैं। ऐसे कई परिवार और टोलियां हैं जो बार-बार डुबकियां लगा रहे हैं। जब सब पानी में उतर जाते हैं तो कोई एक, वस्त्रों की रखवाली के लिए बाहर रुकता है और स्नान कर रहे स्वजनों का मोबाइल से वीडियो बनाता है। कुंभ और संगम का आकर्षण बेशक सनातन परंपरा की मजबूती का करिश्मा है, पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए जैसी सुविधाओं का इंतजाम किया है, उससे यह आकर्षण बढ़ गया। त्रिवेणी के तट पर कुंभनगर में दो और धाराएं लगातार प्रवाहित हैं। एक वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की, तो दूसरी संगम की ओर बढ़ रहे स्नानार्थियों की। डुबकियां जारी हैं ....।  

Posted By: Nawal Mishra

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