प्रयागराज, जेएनएन। पूर्व मंत्री व लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व महामंत्री रविदास मेहरोत्रा की गैरहाजिरी पर विशेष कोर्ट एमपी एमएलए के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने अभियुक्त के विरुद्ध गैर जमानती वारंट व कुर्की का नोटिस जारी की है। मुकदमा पैंतीस साल पुराना है।

क्या था मामला

लखनऊ जिले के थाना हजरतगंज में दर्ज एफआइआर के मुताबिक 22 जुलाई 1984 को रविदास मेहरोत्रा व सीबी सिंह कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस निकाल रहे थे। तभी मुख्यमंत्री के विरोध में भी नारे लगे। हलवसिया बाजार में पहुंचकर मारपीट कर दुकानें भी बंद कराई गईं। जुलूस की अनुमति तक नहीं ली गई। पुलिस ने क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट की धाराओं में मुकदमा कायम किया।

मुकदमे की सुनवाई प्रयागराज में की जा रही है

इस मुकदमें में लखनऊ के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. बाल मुकुंद  ने 20 मार्च 2008 को आरोप तय किया। तब से अब तक मुकदमे में गवाही नहीं हो सकी है। एमपी एमएलए कोर्ट के गठन के बाद से मुकदमे की सुनवाई प्रयागराज में की जा रही है।

जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं ने की हड़ताल

एजूकेशन ट्रिब्यूनल को लखनऊ स्थापित करने वाले विधेयक के विरोध व एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने के बारे में जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हरि सागर मिश्र व मंत्री राकेश कुमार दुबे ने संघ भवन पर बैठक के बाद हड़ताल करने का निर्णय लिया। इसके बाद न्यायिक कार्य ठप कराया। जिला एटा की महिला अधिवक्ता की निर्मम हत्या पर संघ के सदस्य जितेंद्र सिंह, अखिलेश चंद्र शुक्ल, देवेंद्र मिश्र लारा, इंद्रेश कुमार मिश्र, अली अहमद, अनिल कुमार मिश्र अन्नू, पंकज तिवारी, वीरेंद्र कुमार पांडेय, अभय कुमार द्विवेदी ने दु:ख जताया।

 

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Posted By: Brijesh Srivastava

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