प्रयागराज, जेएनएन। पूर्व कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू पर लगे आरोपों और छात्राओं के यौन शोषण मामले की जांच के सिलसिले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने गर्ल्‍स हॉस्टलों का भी निरीक्षण किया। इसमें उन्हें तमाम खामियां मिलीं। सुधार की अपेक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि अब हर दो-तीन माह पर आयोग की टीम विश्वविद्यालय आएगी। वह खुद भी नजर बनाए रखेंगी।

हॉस्टलों में समस्याएं अधिक पर इविवि प्रशासन बना उदासीन : रेखा शर्मा

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि इविवि में हॉस्टलों के हालात बदतर हैं। वहां हर तरफ गंदगी का अंबार दिखाई दिया। कमरों की खिड़कियां और बाउंड्रीवाल भी टूटे हैं। छात्राओं ने भी तमाम समस्याओं को गिनाया। महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक कुंभकर्णी नींद में सो रहा था। कहा कि समस्याओं को कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी को बिंदुवार नोट करा दिया गया है।

एक नजर में जानें पूरा प्रकरण

-02 दिसंबर को छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत की

-06 बजे के बाद शाम को ठेकेदार के लोगों का आवागमन व अश्लील हरकत का आरोप

-04 दिसंबर को सपा सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में उठाया था ये गंभीर मसला

-10 दिसंबर को राजुल बेन एल देसाई की अध्यक्षता में प्रयागराज पहुंची आयोग की टीम

-11 दिसंबर को महिला आयोग की टीम ने छात्रावास का किया निरीक्षण और की पूछताछ

-17 दिसंबर को प्रतापगढ़ से कांग्रेस विधायक आराधना मिश्र ने विधानसभा में उठाया प्रकरण

-200 पेज की अंतरिम रिपोर्ट में आयोग ने सभी आरोपों को बताया सही

-06 शिक्षकों पर यौन उत्पीडऩ करने का आरोप भी मिला सच

-31 दिसंबर को कुलपति पद से प्रो. रतन लाल हांगलू का इस्तीफा

-03 जनवरी को मंत्रालय और राष्ट्रपति ने इस्तीफे को दी मंजूरी

-04 फरवरी को फिर आयोग अध्यक्ष से मिलकर इविवि आने का ऋचा ने किया आग्रह

-12 जनवरी को आयोग अध्यक्ष पहुंची शहर और छात्राओं से मिलीं

-13 जनवरी को इविवि में बैठक और हॉस्टलों का किया निरीक्षण।

बोलीं, आयोग की टीम यह देखेगी कि क्या बदलाव किए गए हैं

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा बोलीं कि अब इविवि में सुधार की कवायद शुरू हो गई है। हर दो से तीन माह में आने वाली आयोग की टीम यह देखेगी कि क्या बदलाव किए गए हैं। कहा यदि मैं यहां होती तो कई टीमों का गठन कर सारी समस्याओं को शीघ्र दूर कर देती।

हॉस्टलों में कैद हैं छात्राएं

महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि हॉस्टलों में छात्राओं को कैदी जैसा रखा गया है। शाम को सात बजे के बाद छात्राओं को बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। दो ताले लगाए जाते हैं। इसके पीछे हवाला दिया जाता है कि सुरक्षा के लिहाज से ऐसा किया जा रहा है। एक तरफ लैंगिक भेदभाव दूर करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है और दूसरी तरफ छात्राओं को कैदी बनाया जा रहा है। कहा कि छात्राओं को भी छात्रों की तरह छूट दी जानी चाहिए। मेस में भोजन भी गुणवत्तापूर्ण नहीं है।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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