प्रयागराज, जेएनएन। कहते हैं कि बच्चे के सामने मजबूती से खड़ी मां के आगे यमदूत भी हार मान लेता है। ममता और आत्मबल की ऐसी ही मिसाल पेश की है प्रयागराज के एक गांव की सीधी सादी महिला ने जिसने कोरोना वायरस के चंगुल में फंसे अपने बेटे को घर पर इलाज कर स्वस्थ कर दिया। सब उनकी तारीफ कर रहे हैं। वह रात दिन अपनी चिन्ता छोड़कर बेटे की तीमारदारी में जुटी रहीं। और फिर मातृत्व की ममता के बल पर अपने संक्रमित बेटे को कोरोना के पंजों से बाहर निकालनें सफल रहीं।  उन्होंने कोरोना को हराकर यह साबित कर दिया यदि नियम और संयम के साथ संक्रमित की देखभाल हो तो कोरोना को हराना आसान है। नौ मई को मातृत्व दिवस के अवसर पर पेश है एक मां की ममता और बेटे के प्रति लगाव की यह खास खबर।

टेस्ट में पॉजीटिव निकला बेटा तो मां ने शुरू की तीमारदारी

यहां बात हो रही ब्लाक बहादुरपुर के बरईपुर गांव निवासी आशा देवी की। उऩका 27 वर्षीय पुत्र मनीष मिश्र एलाइसी में अभिकर्ता हैं। उसकी तबियत पिछले पांच अप्रैल को अचानक खराब हो गई। पहले दो दिन तक बुखार आया। उसके बाद सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ऐसे में घबराए परिवार के लोगों ने आठ अप्रैल को शहर ले जार मनीष की एकअस्पताल में कोविड टेस्ट कराया। जांच में पता चला कि वह कोरोना पॉजीटिव है। डाक्टरों की सलाह पर दवाएं लेकर उसे  होम आइसोलेट कर दिया गया। फिर शुरू की मां आशा देवी ने बेटे की तीमारदारी। दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ उसका घरेलू इलाज शुरू किया। गिलोय,काली मिर्च, सोंठ, लौंग, हल्दी व तुलसी की पत्ती और गुड़ से तैयार काढ़ा उसे दिया जाने लगा। पौष्टिक भोजन और भाप भी दिया जाता रहा। संयम के साथ योग भी मनीष ने किया। महज 15 दिनों में  मनीष ने कोरोना वायरस के संक्रमण को मात दे दी। 

और मां का है यह कहना

आशा देवी कहती हैं कि मेरा बेटा मनीष मिश्र डायबिटीज का भी पेशेंट था लेकिन कोरोना पाॅजिटिव होने पर मैं बिल्कुल घबराई नहीं और डाक्टरों द्वारा दी गई दवा और सलाह के साथ  समय समय पर काढ़ा, भाप, गुनगुने पानी और दूध के साथ  हल्दी पीने को देती रही।  नियम संयम के साथ देख भाल करती रही। ईश्वर की कृपा से बेटे को जल्द ही कोरोना संक्रमण से बनिजात दिला दी। अब वह एकदम स्वस्थ है और परिवार प्रसन्न है।

Edited By: Ankur Tripathi