प्रयागराज : शेरडीह निवासी वीरेंद्र उर्फ करिया की हत्या सुनियोजित ढंग से की गई है। कत्ल की साजिश रचने में शामिल लोगों ने बाहर से भाड़े पर शूटर बुलाए थे। हत्याकांड की तफ्तीश में जुटी पुलिस को कुछ ऐसी ही जानकारी मिली है।

 पुलिस अधिकारियों का कहना है कि  15 नवंबर को संतोष यादव ने जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट में सरेंडर किया और फिर जेल चला गया। सरेंडर की भनक पुलिस तक को नहीं लगी। संतोष के जेल जाने के तीसरे दिन ही वीरेंद्र को गोलियों से भून दिया गया। यानी सरेंडर से कुछ दिन पहले ही कत्ल की साजिश रची गई थी, जिसमें संतोष भी शामिल हो सकता है। पुलिस का यह भी मानना है कि चश्मदीद अमर ने बताया कि बाइक से आए तीन लोगों में एक ने चेहरे गमछा बांध रखा था। जबकि दो शख्स बेनकाब थे। इसका मतलब साफ है कि नकाबपोश हमलावर स्थानीय था और शेरडीह गांव के लोग उसे पहचानते भी रहे होंगे। चेहरा खोलकर वारदात करने के लिए पहुंचने वाले शूटर बाहरी बताए जा रहे हैं।

 चर्चा है कि शूटरों को करीब 20 लाख रुपये की सुपारी दी गई है। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम प्रयागराज के अलावा, प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर और पूर्वांचल के शूटरों के बारे में जानकारी जुटा रही है। कई संदिग्ध शूटरों की वारदात के समय की लोकेशन खंगाली जा रही है। कुछ संदिग्ध बदमाशों को उठाकर पूछताछ चल रही है।

प्रधान सरस्वती समेत कई को उठाया : हत्याकांड में नामजद अभियुक्त ग्राम प्रधान सरस्वती देवी को पुलिस ने पकड़ लिया है। जबकि रामनरेश, आशीष समेत अन्य आरोपितों के करीबियों को उठाकर पूछताछ की जा रही है। एसपी गंगापार सुनील सिंह ने टीम के साथ अभियुक्तों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी की। दबिश के दौरान केवल सरस्वती ही मिली, बाकी लोग घर छोड़कर फरार हैं। पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर अन्य आरोपितों की तलाश चल रही है। मामले में संतोष और उसके बहनोई राम नरेश, मां सरस्वती व रामतीरथ, आशीष, सुनील के खिलाफ एफआइआर है।

वीरेंद्र पर बरसाई गईं 10 गोलियां :

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि वीरेंद्र को10 गोली मारी गई थी। सिर, पैर और पेट से तीन गोली मिली, जबकि शरीर के अन्य हिस्से में लगी सात गोलियां आर-पार हो गईं थीं। हालांकि पुलिस का कहना है घटनास्थल से पिस्टल के चार खोखे ही बरामद हुए हैं।

Posted By: Brijesh Srivastava

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