प्रयागराज,जेएनएन। श्रीरामचरितमानस के मर्मज्ञ मोरारी बापू ने शनिवार को राम कथा के माध्यम से सीख दी कि बड़े -बुजुर्गों का सम्मान करें। जैसे वट वृक्ष को प्रणाम करते हैं वैसे ही बड़ों का आदर करें। माता-पिता ईश्वर के समान हैं। इसलिए उनका सबसे पहले आदर करें। जो जन्मदाता का आदर नहीं करता है, वह राष्ट्र का भी नहीं हो सकता।

 

हर वट वृक्ष शिव स्वरूप है लेकिन सीता वट राम स्वरूप

बापू ने बताया कि एक-दो महीने में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन होगा, ऐसी संभावना है। वाल्मीकि आश्रम में स्थित सीता वट का महत्व बताया। कहा कि हर वट वृक्ष शिव स्वरूप है लेकिन सीता वट राम स्वरूप है। इसके पत्तों पर प्रभु सोते हैं। कहा कि कल्पतरु धर्म, अर्थ और काम ही देता है जबकि सीता वट योग पीठ है, प्रेम पीठ है, वैराग्य पीठ है।

मानस कर रही आपकी प्रतीक्षा

बापू ने कहा कि मानस ग्रंथ भी प्रतीक्षा करता है कि कोई आए और पढ़े। पढ़ नहीं सकता तो स्पर्श करे। यह भी नहीं कर सकता तो केवल देख ही ले। चौपाइयां मानस के गायकों की प्रतीक्षा करती हैं।

क्रोध आने पर पानी से मुंह धुलो

मोरारी बापू ने बताया कि क्रोध आए तो ठंडे पानी से मुंह धो लो। शांत हो जाओ। क्रोध अंधेरे के समान है जिसमें कुछ नहीं दिखता। क्रोध पर थोड़ा रुकिए। यह तपस्या है। क्रोध आए तो दर्पण देखिए।

बच्चों को निश्चित उम्र में दें मोबाइल

बापू ने कहा कि बच्चों को निश्चित उम्र में ही मोबाइल दें। पूछा कि हम पाश्चात्य क्यों होते जा रहे हैं? बच्चों को ङ्क्षहसा वाले धारावाहिक नाटक नहीं रामायण दिखाओ। इससे उनमें संस्कार बढ़ेंगे।

Posted By: Brijesh Srivastava

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