जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : महीयसी महादेवी वर्मा नारी शक्ति का प्रतीक हैं। वह प्रेरक रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता के जरिए नया आयाम बनाया है। प्रदेश की महिला, बाल कल्याण, पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने यह बातें कही। वह महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि पर साहित्यकार संसद रसूलाबाद में मंगलवार को आयोजित विचार गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहीं थीं।

उन्होंने कहा कि संस्था के लोग महादेवी के नाम से ऑडिटोरियम बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजें वह उसमें पूरी मदद करेंगी। अध्यक्षता करते हुए डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि महादेवी की काव्य चेतना में करुणा के भाव का विकास है, जो हर वर्ग के लोगों को जोड़ती है। प्रो. राम किशोर शर्मा ने कहा कि महादेवी की रचना रहस्यवादी है। डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि महादेवी की काव्य चेतना सार्वभौमिक है। ज्ञान माता डॉ. राधा सत्यम, प्रो. सोम ठाकुर, डॉ. दयानंद मिश्र ने महादेवी को अद्वितीय रचनाकार बताया। वर्तिका त्रिपाठी ने महादेवी के काव्य पर मोहक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं दूधनाथ शर्मा 'श्रीश' की काव्य संग्रह 'रूप की गागरी' का लोकार्पण हुआ। संयोजन व संचालन डॉ. प्रद्युम्न त्रिपाठी 'करुणेश' ने किया।

द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन प्रो. सोम ठाकुर की अध्यक्षता में हुआ। दूधनाथ शर्मा ने 'मुंडरे पै सावन अंगनवा में घाम-अधरा ने गीत लिख बदरा के नाम' सुनाया। गीतकार प्रो. सोम ठाकुर ने 'करते हैं तन-मन से वंदन, जन गण मन की अभिलाषा का' सुनाया। संचालन अशोक टाटम्बरी व आभार रामलखन शुक्ल ने ज्ञापित किया।

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'महादेवी काव्य साहित्य की धरोहर'

महादेवी वर्मा की पुण्य तिथि पर ¨हदुस्तानी एकेडमी में 'महादेवी वर्मा का काव्य चिंतन' विषयक गोष्ठी हुई। अध्यक्षता कर रहीं डॉ. यासमीन सुल्ताना नकवी ने कहा कि महादेवी काव्य साहित्य की विश्व धरोहर हैं। विदेशों में महादेवी वर्मा की लोकप्रियता अधिक है। डॉ. कल्पना वर्मा ने कहा कि महादेवी ने दिव्य पुरुष को अपना प्रेम इष्ट मान कर उसके साथ रागात्मक संबंध स्थापना की है। एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. मुदिता तिवारी ने विचार व्यक्त किए।

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नगर निगम के रवैए से रचनाकार नाराज

नगर निगम द्वारा महीयसी महादेवी वर्मा के आवास का गृहकर माफ न करने पर साहित्यकारों ने नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि महादेवी न सिर्फ इलाहाबाद बल्कि राष्ट्र की विभूति हैं, उनके नाम पर गृहकर भेजना अत्यंत निराशाजनक है।

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महादेवी वर्मा के नाम पर गृहकर नोटिस भेजना अत्यंत चिंताजनक है। महादेवी राष्ट्र की विभूति हैं। नगर निगम द्वारा उनका गृहकर माफ न उनके गैर जिम्मेदाराना रवैए को दर्शाता है।

-रविनंदन सिंह, साहित्यकार

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महादेवी के निधन के कई साल बाद गृहकर का नोटिस भेजना फिर वादे के अनुरूप उसे माफ न करना निंदनीय है। यह एक महान विभूति की छवि धूमिल करने के समान है।

-शैलेंद्र मधुर, गीतकार

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महापौर ने वादा किया था कि वह सदन में प्रस्ताव लाकर महादेवी वर्मा के नाम से गए गृहकर को माफ कराएंगी। उन्हें अपना वादा निभाना चाहिए, उन्होंने अभी तक ऐसा क्यों नहीं किया वह भी स्पष्ट करें।

-अनुपम परिहार, साहित्यकार

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नगर निगम यह झूठ बोल रहा है कि न्यास द्वारा वहां पर मकान से संबंधित दस्तावेज जमा नहीं कराए हैं। इसकी पावती मेरे पास है। अगर नगर निगम दोबारा सभी दस्तावेज मांगता है तो उसके प्रेषित कर दिया जाएगा।

-बृजेश पांडेय, सचिव, साहित्य सहकार न्यास

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वादा कर भूलीं मेयर, महादेवी 55 हजार की बकायेदार

शहर की गौरव रहीं महादेवी वर्मा दिवंगत होने के बाद भी नगर निगम की 55 हजार रुपये की बकायेदार हैं। बीते साल नगर निगम की तरफ से जारी गृहकर वसूली के नोटिस का शहर में खासा विरोध हुआ था। मेयर अभिलाषा गुप्ता ने उस वक्त इसे माफ कराने का वादा किया था, पर अब फिर गृह कर बिल भेज दिया गया है। इससे साहित्यकारों में गहरा रोष है। उधर, निगम के अफसरों का कहना है कि नियमानुसार ही गृहकर जमा करने के लिए नोटिस भेजा गया है।

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'गत वर्ष महादेवी जी के आवास में रहने वालों से कहा गया था कि वह मकान को साहित्य सहकार न्यास के रूप में दर्ज कराने के लिए वसीयत आदि दस्तावेज प्रत्यावेदन के साथ जमा कराएं, ऐसा नहीं हुआ। इसलिए गृहकर माफी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।'

अभिलाषा गुप्ता नंदी, महापौर

Posted By: Jagran