प्रयागराज, जागरण संवाददाता। बैंकों में फिक्स डिपाजिट (एफडी) करने वाले ऐसे लोगों को उनकी जमा धनराशि पर बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज के बराबर ब्याज मिलेगा, जिन्होंने एफडी की अवधि (मेच्योरिटी) पूरी होने पर भुगतान नहीं लिया था। बचत खाते की दर से मिलने वाले ब्याज से एफडी करने वाले को नुकसान होगा, क्योंकि एफडी और बचत खाते पर ब्याज रेट अलग है।

अवधि पूरी होने पर ब्याज लगना होता है बंद

बैंकों में एफडी करने वाले जो लोग उसकी अवधि समाप्त होने पर रिन्यूअल नहीं कराते, उनकी रकम बैंक के ओवरड्यू डिपाजिट में चली जाती थी। लिहाजा, उस रकम पर ब्याज लगना बंद हो जाता था। ऐसे प्रकरणों के निस्तारण के संबंध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने दो जुलाई को सर्कुलर जारी किया है। इससे जिस भी एफडी करने वाले की रकम बैंक में पड़ी है, एफडी की अवधि समाप्त होने वाली तारीख से भुगतान लेने वाले दिन तक बचत खाते की दर से उन्हें ब्याज मिलेगा। मौजूदा समय में बचत खाते पर ब्याज दर 2.75 फीसद है। लेकिन, एफडी के मामले में हर बैंकों के ब्याज दर में 0.25 फीसद का अंतर हो सकता है। एलडीएम आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि 2016 के पहले कोई व्यक्ति एफडी कराता था और अवधि समाप्त होने पर भुगतान नहीं लेता था तो रकम ओवरड्यू डिपॉजिट में चली जाती थी। हालांकि, चार-पांच सालों में ओवरड्यू डिपॉजिट बंद हो गया। अवधि पूरी होने पर एफडी का रिन्यूअल स्वत: हो जाता है। एफडी पर बचत खाते की दर से ब्याज ज्यादा मिलता है।

Edited By: Ankur Tripathi