जासं, इलाहाबाद : विश्व के छोटे-छोटे देशों की तुलना में भारत की विकास दर बहुत पीछे है। मानव विकास के क्रमांक में भारत 131वें स्थान पर है, जबकि मालदीव व श्रीलंका जैसे देश हमसे ऊपर हैं। इसके बावजूद भारत का सामान्य व्यक्ति आज कई विकसित देशों से अधिक खुशहाल है। उक्त बातें शनिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यानमाला की श्रृंखला में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने व्यक्त किए।

प्रो. सिंह ने 'विकास का स्वास्थ्य' विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति, सुरक्षा की भावना, सामाजिक गरिमा, आध्यात्मिक उत्कर्ष तथा स्वहित से ऊपर उठकर जनहित को समझने की चेतना सभी में आनी चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि विकास का प्रभाव पर्यावरण पर परिलक्षित है। पर्यावरण का क्षरण हो रहा है। पर्यावरण के प्रति सजगता बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हमारे कृत्य से वायु, जल, और मिट्टी दूषित न हो। विकास की दौड़ में ध्यान रखने की बात यह है कि इसका लाभ सभी तक समान रूप से पहुंचे और असमानता की खाई को पाटा जा सके।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि विकास की असली तस्वीर सामने लाने के लिए हमें सात लाख गांवों में सात लाख रोल मॉडल व्यक्तियों की आवश्यकता है। उन्होंने अन्ना हजारे को रोल मॉडल बताते हुए कहा कि रालेगण सिद्धि को उन्होंने देश के आदर्श गांव का दर्जा दिलाया, जहां आज प्रशासनिक सेवाओं में चयनितों को ट्रेनिंग दी जाती है। विकास के लिए एक जीवन दृष्टि होनी चाहिए तभी असमानता की खाई को कम किया जा सकता है। संचालन डॉ. मीरा पाल ने किया। डॉ. रुचि वाजपेयी व डॉ. श्रुति ने वन्देमातरम् प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. गिरिजा शकर शुक्ल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. अरुण कुमार गुप्त ने किया।

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