प्रयागराज, जेएनएन। माघ मेला-2020 की धर्म संसद से इस बार साधु संत अयोध्या में राम जन्मभूमि का मुद्दा नहीं, बल्कि काशी-मथुरा और गोहत्या पर रोक लगाने का शंखनाद करेंगे। क्योंकि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा तो उच्चतम न्यायालय से सुलझ चुका है, इसलिए धर्म संसद में यह मामला प्रमुख एजेंडे का केंद्र बिंदु नहीं रहेगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसके संकेत दिए हैं। संत समाज भी इस पर विचार मंथन में जुट गया है।

अयोध्या राम मंदिर को लेकर हर वर्ष माघ मेला में रणनीति बनती थी

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण एक ऐसा मुद्दा रहा है, जिस पर हर साल प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले में संत समाज कोई न कोई रणनीति बनाता ही रहा है। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंहल कभी इस धर्म संसद की अगुवाई किया करते थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद भी धर्म संसद जारी रही। अब संतों के सामने काशी-मथुरा के मामले हैं। काशी में शिवजी के मंदिर के बगल में मस्जिद और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म भूमि के बगल में मस्जिद होने का विवाद है। पूर्व में इन दोनों मामलों पर भी संत समाज आक्रामक होता रहा है।

बोले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि

माघ मेला जनवरी 2020 में लगना है। इसमें धर्म संसद फिर लगने की पूरी संभावना है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि काशी और मथुरा के मामले सभी के सामने हैं। इन पर धर्म संसद में चर्चा होगी। साथ ही गोहत्या पर रोक लगाने की पुरजोर मांग की जाएगी।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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