प्रयागराज : प्रयागराज में कुंभ मेले का समापन हो चुका है। यहां देश के कोने-कोने और विदेशों से करोड़ों की संख्‍या में स्‍नानार्थी और पर्यटक आए। अपने साथ यहां की यादें भी संजोई। अब संगम तट पर संपन्न हुए दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन कुंभ मेला पर आइआइएम बेंगलुरु के छात्रों और प्रोफेसरों की टीम शोध कर रही है।

श्रद्धालुओं और उनके लिए व्यवस्था पर हो रहा शोध
15 जनवरी से चार मार्च तक चले आस्था के इस दिव्य और भव्य कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं का पहुंचना और संगम में डुबकी लगाना पूरी दुनिया के लिए आश्चर्य का केंद्र रहा। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु और उनके लिए सरकार की ओर से की गई व्यवस्था पर ही शोध कार्य हो रहा है। इस बार के कुंभ मेले में 20 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए सभी इंतजाम कैसे किए गए? कुंभ में नगर नियोजन, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, जन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, प्रोजेक्ट प्रबंधन, तकनीक और आईटी का प्रयोग, जनसंपर्क कैसे किया और पर्यटन को कैसे बढ़ावा मिला? आइआइएम की टीम इन्ही विषयों पर शोध कर रही है।

शोध के लिए भेजा गया था कई संस्थानों को पत्र
मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि कुंभ पर शोध कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए देश-विदेश के कई संस्थानों को पत्र भेजा गया था। अंतिम चरण में आइआइएम बेंगलुरु के साथ करार हुआ। बेंगलुरु की टीम में चार प्रोफेसरों के साथ शोध छात्र शामिल हैं। संस्थान ने स्थानीय स्तर पर भी कुछ शोध छात्रों को इस काम में जोड़ा है। टीम रिपोर्ट में यह भी बताएगी कि आगे कुंभ में और बेहतर क्या हो सकता है। टीम मई के अंत तक शोध रिपोर्ट सौंपेगी। उसके बाद इसे केंद्र और प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।

पिछले कुंभ पर हॉवर्ड विश्वविद्यालय ने किया था शोध
पिछली बार यहां के कुंभ मेले की रिपोर्ट कैंब्रिज (अमेरिका) के हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने तैयार की थी। मेलाधिकारी ने बताया कि इस बार आइआइएम का प्रस्ताव सबसे बेहतर रहा। इसलिए उसे चुना गया।

यह थी कुंभ मेले की विशेषता
32 वर्ग किलोमीटर में लगा था
22 पांटून पुल बनाए गए थे
20 सेक्टरों में बांटा गया था
1.22 लाख शौचालय की व्यवस्था थी
300 किलोमीटर बनी थी चकर्ड रोड
850 किमी बिछी थी पेयजल लाइन
45000 एलईडी लाइट लगाई गई थी
54 विद्युत सब स्टेशन बनाए गए थे।
6000 संस्थाओं को दी थी जमीन
22000 सफाई कर्मचारी लगे थे
20000 कूड़ेदान रखे गए थे
30000 से अधिक जवान तैनात थे
34 मोबाइल टावर लगाए गए थे
05 लाख वाहनों के लिए थी पार्किग
100 बेड का मुख्य अस्पताल बना था
01-01 अस्पताल थे हर सेक्टर में
193 डॉक्टर, 15000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मी
80 आयुर्वेदिक डॉक्टर 86 एंबुलेंस
नौ रिवर एंबुलेंस, एक एयर एंबुलेंस की व्यवस्था थी
5000 वाटर स्टैंड पोस्ट लगे थे
20000 श्रद्धालुओं के एक साथ रुकने के लिए बने थे 87 पंडाल
07 पंडाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए थे

इतनी थी खाद्य सामग्री की व्यवस्था
5384 टन चावल 7834 टन आटा 3174 टन चीनी

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