राजेंद्र यादव, प्रयागराज। सोलहवीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई सड़क की दशा भी बदल गई है। इस सड़क पर कई जगह गड्ढे तो हो ही गए हैं, बारिश का पानी भी सड़क पर कई जगहों पर इस कदर भर जाता है कि लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। इस सड़क को पुरानी जीटी रोड कहा जाता है जो पुराने शहर से होकर गुजरती है। खुल्दाबाद, शाहगंज, कोतवाली, मुट्ठीगंज, कीडगंज इलाके से होती हुई यह सड़क वाराणसी को जाती है। भले ही इस पर डामर गिट्टी डालकर पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ने इसे कई बार बनवाया, लेकिन डामर उखड़ने के बाद शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई सड़क फिर नजर आने लगती है। शाहगंज थाने से बहादुरगंज चौराहे तक यह सड़क आज भी बीच-बीच में दिखाई पड़ती है, जाे आमतौर पर बनाई गई सड़क से अलग नजर आती है।

पाकिस्तान के पेशावर से बनवाई गई थी सड़क

शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई यह सड़क पाकिस्तान के पेशावर से शुरू होती है। भारत-पाक बार्डर के वाघा में प्रवेश करने से पहले यह अटॉक, रावलपिंडी और लाहौर से होकर गुजरती है। वाघा में दाखिल होने के बाद जब यह भारत में प्रवेश करती है तो सबसे पहले अमृतसर पहुंचती है। यहां से अंबाला, दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आसनसोल होते हुए कोलकाता को जाती है। इसके बाद यह बांग्लादेश में प्रवेश करते हुए देश के नारायणगंज जिले में सोनार गांव पर पहुंचकर खत्म होती है। इसे पुरानी जीटी रोड के नाम से जाना जाता है। इसकी लंबाई 2,500 किमी. से अधिक बताई जाती है।

इसी प्रमुख सड़क से होकर गुजरता है रामदल

दशहरे पर रामदल जब निकलता है तो इसी पुरानी जीटी रोड से होकर गुजरता है। भोर में निकलनी वाली श्रृंगार की चौकियों का भी मुकाबला कोतवाली थाने के सामने इसी मार्ग पर होता है। भरत मिलाप भी लोकनाथ चौराहे पर इसी सड़क पर होता है। इसके अलावा इसी मार्ग पर स्थित लोकनाथ चौराहे पर भव्य होली खेली जाती है।

किसी ने पाइप लाइन तो किसी ने सीवर लाइन के लिए खोद डाली सड़क

शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई यह सड़क कभी अपने आप नहीं उखड़ी। तेज बारिश भी इस पर कभी कोई असर नहीं पहुंचा सकी। इतना ही नहीं तमाम कवायद के बाद भी इस पर डामरयुक्त सड़क का पूरी तरह से निर्माण नहीं हो सका। लेकिन इस सड़क की हालत कुछ जगहों पर खुद लोगों ने ही बिगाड़ दी। कुछ ने पानी के पाइप लाइन के लिए सड़क खोदवा दी तो कुछ ने सीवर लाइन बिछाने के लिए कई जगह सड़क को खोद डाला।

Edited By: Ankur Tripathi