यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इलाहाबाद में गंगा की धारा हुई पश्चिम वाहिनी
गंगा की झूंसी की तरफ निकली धारा महावीर मार्ग पांटून पुल के शुरुआत से निकली धारा की तरफ शिफ्ट हो ...और पढ़ें

इलाहाबाद [राजकुमार श्रीवास्तव]। गंगा की महिमा अपरंपार है। माघ मेले के लिए संगम की रेती पर जहां कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं मुकम्मल की जा रही हैं, वहीं संगम नोज पर कम पानी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा से श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए भरपूर पानी की व्यवस्था करने में एक सप्ताह से सिंचाई विभाग जुटा है।
उसकी इस कवायद से गंगा की झूंसी की तरफ निकली धारा महावीर मार्ग पांटून पुल के शुरुआत से निकली धारा की तरफ शिफ्ट हो रही हैं। इससे गंगा की धारा पश्चिमी वाहिनी हो गई हैं। पानी कम होने से दारागंज में नागवासुकी मंदिर के पास से इस बार गंगा की दो धाराएं बन गई हैं। इससे पानी का बहाव भी कम हो गया है। संगम नोज तक दोनों धाराओं के बीच जगह-जगह रेत हो जाने से वहां भी पानी कम हो गया है।
इसी वजह से नोज पर रेत को काटकर दोनों धाराओं को मिलाने के लिए सिंचाई विभाग ने दो पोकलैंड और जेसीबी लगाई गई है। आधा दर्जन ट्रैक्टरों से घाट के पास समतलीकरण का कार्य भी किया जा रहा है। रेत को काटने से इकट्ठा होने वाली बालू से वहीं करीब एक किलोमीटर लंबा घाट बनाया जाना है।
माना जा रहा है कि दोनों धाराओं के बीच रेत हटा दिए जाने से जिस तरह महावीर पांटून पुल के पास धारा पश्चिम वाहिनी हो गई हैं।उसी तरह संगम नोज पर भी धारा पश्चिम की तरफ परिवर्तित हो जाएंगी। इससे श्रद्धालुओं को घाट पर ही नहाने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। घाट बनने की प्रगति देखने से लगता है कि उसके पूरा होने में चार-पांच दिन से कम नहीं लगेगा।
यह भी पढ़ें: बरसाना में सीएम योगी आदित्यनाथ व सांसद हेमामालिनी खेलेंगे लट्ठमार होली
टीकरमाफी आश्रम के पीठाधीश्वर के स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी कहते हैं, गंगा के पश्चिम वाहिनी होने से भविष्य का शुभ संकेत मिलता है। गंगा जी यमुना से दौड़कर मिलती हैं। दौड़कर मिलने का ही भाव है कि संगम पर यमुना गंगा में समाहित हो जाती हैं।
वहीं सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार सिंह कहते हैं, पश्चिम वाहिनी गंगा का बहुत महत्व बताया जाता है। घाट बनाने का कार्य मंगलवार तक पूरा हो जाएगा। नरोरा से पानी छोड़े जाने से गंगा में बहाव तेज हो गया है।