प्रयागराज, जेएनएन। मंदिर से लेकर बरात घर तक जिस गुलाब की वजह से वातावरण में खुशबू बिखरी रहती थी, उसी गुलाब की खुशबू लॉकडाउन में घट गई है। बिक्री घटने से फूलों की खेती करने वाले किसानों की कमाई भी घट गई है। आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे फूलों का कारोबार करने वालों ने हौसला नहीं खोया। जी हां, अब वही माली कुटीर उद्योग लगाकर गुलाब के फूलों से गुलकंद, जैम व गुलाब जल बनाकर आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। लॉकडाउन में आप भी ये सब अपने घरों में बना सकते हैं। हम आपको इसे बनाने की विधि बताएंगे।

विवाह घर से लेकर मंदिर तक में ताले बंद हैं

क्षेत्र के कजियां गांव निवासी किसान देवेंद्र सिंह पुत्र महेश बक्स सिंह एक बीघे में गुलाब की खेती कर रखी है। वैवाहिक कार्यक्रमों में गुलाब के फूलों की कमाई से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती थी। सहालग के मौसम में वह प्रतिदिन एक हजार रुपये से अधिक की कमाई कर लेते थे। वहीं लॉकडाउन के चलते अब वह प्रतिदिन महज 150 रुपये का ही फूल बेच पा रहे हैं। विवाह घर से लेकर मंदिर तक में ताले बंद हैं। इससे गुलाब के दामों में भी भारी कमी आई है। फूलों को समय पर नहीं तोडऩे पर वह खेत में ही नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में उन्होंने कुटीर उद्योग लगाकर गुलाब के फूलों की पंखुडिय़ों से गुलकंद, जैम व गुलाब जल बना रहे हैं।

ऐसे बनाते हैं गुलकंद

गुलाब की पंखुडिय़ों को तोड़कर उसे साफ कपड़े में आधे घंटे तक फैला दें। उसके बाद एक बर्तन में गुलाब की पत्ती और चीनी डालकर मिलाएं। चीनी मिक्स गुलाब की पत्तियों को हाथों से मिला लें। उसके बाद कढ़ाही में रखे ओर गुलाब और चीनी के मिश्रण को दो मिनट तक चलाते रहे। अब इसमें एक चम्मच सौंफ व इलायची पाउडर डाल दें। दो मिनट बाद मिश्रण में शहद भी अच्छे से मिला लें। जब चीनी गल जाए तो समझिए गुलकंद तैयार हो गया। अब इसे सूखे शीशे के जार में भरकर रखें। यह साल भर तक खराब नहीं होता।

गुलकंद सेवन के फायदे

गुलकंद शरीद के अंगों को ठंडक पहुंचाता है। इसके सेवन से दिमाग शांत रहेगा और गुस्सा नहीं आएगा। कब्ज, अपच की समस्या के लिए गुलकंद रामबाण साबित हो सकता है। इसके अलावा आंखों की रोशनी बढ़ाने, मुंह के छालों में गुलकंद का प्रयोग फायदेमंद होता है।

आर्डर न मिलने का दंर्द भी छलका

नवाबगंज में गुलाब की खेती करने वाले नितिन माली बताते हैं कि हम लोग गुलाब की खेती और माला-फूल की दुकान से लगन में अच्छी कमाई कर लेते थे। हालांकि इस बार शादियां न होने से फूलों की बिक्री नाम मात्र की है, जिससे किसान की लागत भी नहीं निकल पा रहा है। नवाबगंज के प्रमोद माली शादी-विवाह के समय गेस्ट हाउस व घर सजाने का आर्डर लेते हैं। वह बताते हैं कि लॉकडाउन से अधिकतर मंदिरों पर पूजा पाठ करने वाले लोग नही जा रहे हैं। इससे आमदनी नहीं हो पा रही है।

नैनी व रामबाग है फूलों की थोक मंडी

फूलों की थोक सप्लाई का काम नैनी तथा रामबाग में होता है। इस समय मंडी सुबह पांच बजे से सात बजे तक खुलती है। लॉकडाउन होने के चलते बाजार में गुलाब के अलावा अन्य फूलों की बिक्री बिल्कुल भी नहीं है। इस समय गुलाब के फूलों से बना माला पांच रुपये में बिकता है जबकि लगन में यही माला 20 रुपये में बिक जाता था।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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