जासं, प्रयागराज : फर्जी कंपनी बनाकर 125 करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइंस पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया है। मामले में पंजाब के प्रीतम सिंह, अमरजीत सिंह चीमा, गुरुदीप सिंह, उरई जालौन के राजीव कुमार निरंजन और झांसी के उत्तम सिंह निरंजन को नामजद किया है। एफआइआर नैनी निवासी राजेंद्र कुमार शर्मा की तहरीर दर्ज हुई है। सभी पर धोखाधड़ी करने और धमकी देने का आरोप है।

राजेंद्र कुमार शर्मा का आरोप है कि कुछ साल पहले सिविल लाइंस के तुल्सियानी प्लाजा में स्थित कंपनी के बारे में पता चला। तब उन्होंने अपना, परिवार और सगे-संबंधी के अलावा आसपास के लोगों का भी पैसा निवेश कराया। कंपनी ने ऑफर दिया था कि पैसा छह साल में दो गुना और सात साल में ढाई गुना हो जाएगा। तब उन्होंने सभी लोगों का मिलाकर 125 करोड़ रुपये का निवेश किया। प्रीतम सिंह कंपनी के सीएमडी, अमरजीत व गुरुदीप डायरेक्टर और राजीव व उत्तम प्रमोटर थे। कंपनी के अधिकारी कहते थे कि एक कंपनी में पैसा जमा करेंगे तो दूसरे से वापस होगा। मगर जब पैसा वापस करने का समय आया तो अधिकारी कंपनी के दफ्तर में ताला लगाकर भाग गए। कई बार संपर्क के बावजूद पैसा नहीं वापस हुआ। 20 अगस्त 2019 को पहले सिविल लाइंस फिर एसएसपी दफ्तर में शिकायत दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नही हुई। इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आदेश होने पर अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है।

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1998 से 2013 के बीच खोली गई सात कंपनी -

राजेंद्र के मुताबिक, 17 दिसंबर 1998 को गंगा कावेरी इंडिया लिमिटेड को पहली कंपनी खोली गई। फिर जीसी डेयरी इंडिया लिमिटेड के नाम से वर्ष 2000 में दूसरी, जीसीए मार्केटिग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से 2005 में तीसरी, स्टार युनाइटेड ट्रेड मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से 2007 में चौथी कंपनी खोली गई। इसी तरह 2013 में फौजा रिजनरेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से पांचवीं, ट्राइगो रियरिग एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से छठवीं और जीकेवीएस मल्टीपज कॉ-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के नाम से सातवीं कंपनी खोली गई। सभी का दफ्तर तुल्सियानी प्लाजा में ही था।

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कई जिले के 27 लोगों से हुई धोखाधड़ी -

शातिरों ने रकम दोगुना करने के नाम पर कई जिले के 27 लोगों से धोखाधड़ी की। एफआइआर के मुताबिक, कौशांबी, फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ के लोगों से बड़ी रकम निवेश कराई गई। सबसे ज्यादा कौशांबी और प्रयागराज के लोग फर्जी कंपनी के चक्कर में फंसे। सात साल का वक्त बीतने के बाद जब निवेशकों ने पैसे की मांग शुरू की तो पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।

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