प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रयागराज जिले में शंकरगढ़ के कान्हा गोशाला में गोवंश के मरने का सिलसिला जारी है। यहां के जिम्मेदार इसकी वजह मवेशियों के पेट में पालीथिन की अधिकता बता रहे हैं। विहिप की गोरक्षा इकाई के पदाधिकारियों का आरोप है कि गोशाला में गोवंश की ठीक से देखरेख नहीं हो रही है। उनके लिए चारा और पानी का भी पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। जो मवेशी मर रहे हैं, उनका पोस्टमार्टम भी नहीं कराया जा रहा है। इस प्रकरण की जानकारी गोरक्षा के प्रांत मंत्री लाल मणि तिवारी ने मुख्यमंत्री को ईमेल से भेजी है।

शंकरगढ़ के कान्‍हा गोशाला में मवेशियों की हो रही मौत

विहिप की गोरक्षा इकाई के प्रांत मंत्री लाल मणि तिवारी का कहना है कि गोशाला के जिम्मेदार अधिकारी तथ्यों को छुपाकर भ्रम फैला रहे हैं। जब वह शंकरगढ़ के कान्हा गोशाला में निरीक्षण को गए तो पानी से भरे गड्ढे में 12 गोवंश के शव जेसीबी से उठवाकर फेंके गए थे। इसके अतिरिक्त वहां के रिकार्ड के अनुसार 16 अगस्त को 10, 17 अगस्त को 13, 18 अगस्त को 15, 19 अगस्त को 11, 20 अगस्त को 10, 21 अगस्त को 13, 22 अगस्त को 12 और 23 अगस्त को 12 गोवंश की मौत हुई थी।

गोरक्षा इकाई पदाधिकारियों ने अपर नगर आयुक्‍त पर लगाया आरोप

गोरक्षा इकाई के पदाधिकारियों का आरोप है कि गोशाला का कार्य देख रहे अपर नगर आयुक्त मुशीर अहमद व आफाक अहमद फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कराकर अपने बचाव का रास्ता खोज रहे हैं।

गोवंशों को दलदल से निकलवाया

गोरक्षा इकाई के प्रांत मंत्री ने बताया कि जब वह निरीक्षण पर गए तो कई गोवंश दलदल में फंसे मिले। उन्हें कार्यकर्ताओं की मदद से बाहर निकलवाया। कहा कि गोशाला परिसर की खुदाई कराने पर वहां गोवंशों के अस्थि पंजर बहुतायत में मिलेंगे, क्योंकि आए दिन भूख-प्यास से वहां मवेशी मर रहे हैं। उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से मांग की गई है कि गोशाला की बदहाली और गोवंशों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

Edited By: Brijesh Srivastava