प्रयागराज, जागरण संवाददाता। कोरोनारोधी टीके कोविशील्ड और कोवैक्सीन से बनने वाली एंटीबाडी अब संशय तथा कयासों में नहीं बल्कि, प्रायोगिक तौर पर लिखापढ़ी में दर्ज होगी। वैक्सीन पर अध्ययन मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के टीकाकरण केंद्र में होगा। इसमें पहली डोज लगवाने से पहले और दोनों डोज के छह महीने बाद तक चार बार रक्त के नमूने लिए जाएंगे। इस बीच लाभार्थी को ध्यान भी कराया जाएगा। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के फिजियोलाजी विभाग की एक जूनियर डाक्टर ममता दुबे सोमवार से इस अध्ययन की शुरुआत करेंगी।

यह अपनाई जाएगी प्रक्रिया

जिस लाभार्थी पर अध्ययन होगा उससे सर्वप्रथम सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराया जाएगा। पहली डोज लगवाने से पहले उसके रक्त का नमूना लिया जाएगा। टीके की पहली डोज के 21 दिन बाद दूसरी बार रक्त का नमूना लिया जाएगा। तीसरी बार रक्त नमूना टीके की दूसरी डोज लगने के 21 दिन बाद और फिर पहली डोज की तारीख से छह महीने बाद एक और रक्त नमूना लिया जाएगा। इन छह महीनों में लाभार्थी को ध्यान भी कराया जाएगा। माना जा रहा है कि ध्यान करने से टीके का प्रभाव (एंटीबाडी टाइटर) बढ़ जाता है।

निशुल्क होगी यह जांच

टीकाकरण केंद्र के नोडल अधिकारी डा. उत्सव सिंह ने बताया कि एंटीबाडी टाइटर की यह जांच पूरी तरह निश्‍शुल्क होगी। जबकि आमतौर पर एंटीबाडी पता लगाने के लिए निजी लैब में काफी शुल्क लगता है।

मिल चुकी है अनुमति

एंटीबाडी टाइटर जांच के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज की इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी से अनुमति मिल चुकी है। इसका एक पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को भी भेजा गया है।

विभागाध्यक्ष करेंगे मार्ग निर्देशन

यह पूरा अध्ययन फिजियोलाजी विभागाध्यक्ष डा. आरबी कमल के मार्ग निर्देशन में होगा। टीकाकरण केंद्र के नोडल अधिकारी डा. उत्सव सिंह सह मार्ग निर्देशक रहेंगे।

Edited By: Brijesh Srivastava