प्रयागराज, जेएनएन।  घने कोहरे के बीच पौष पूर्णिमा पर संगम में पुण्य की डुबकी लगाने का सिलसिला भोर से शुरू हुआ तो शाम तक चलता रहा। सुबह कोहरे का प्रकोप ज्यादा होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ कम थी लेकिन ज्यों-ज्यों कोहरा छटता गया, श्रद्धालुओं की भीड़ संगम और अन्य गंगा घाटों पर बढ़ती गई। शाम तक करीब साढ़े छह लाख लोगों ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। इसी स्नान के साथ ही महीने भर तक चलने वाला कल्पवास भी शुरू हो गया है।

बुधवार रात से आने लगे थे स्नानार्थी 

पौष पूर्णिमा पर संगम में स्नान के लिए बुधवार की शाम से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। तमाम श्रद्धालु रात में ही मेला क्षेत्र में आ गए थे। भोर में कोहरे की धुंध के बीच उन्होंने स्नान शुरू हुआ। कोहरे की चादर ऐसी छाई थी कि कुछ दूर आगे भी साफ नहींं दिख रहा था। इसलिए सेक्टर तीन, चार और पांच में बसे कल्पवासियों ने वहीं बने घाटों पर स्नान किया। जबकि संगम नोज पर अधिकतर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु पहुंच रहे थे। कोहरे के कारण दूर से आने वाले श्रद्धालु रास्ते में फंस गए। संगम नोज पर कोहरे का पूरा असर रहा और भीड़ कम थी। वहां पहुंचे स्नानार्थियों ने हर हर गंगे के जयघोष के साथ स्नान किया। मौसम के रुख को देखते हुए तमाम लोगों ने संगम नोज न जाकर नैनी के अरैल घाट और फाफामऊ घाट पर स्नान किया। झूंसी की तरफ से आने तमाम श्रद्धालुओं ने सेक्टर तीन, चार और पांच में बनाए गए घाटों पर स्नान किया। करीब नौ बजे के बाद कोहरे का प्रकोप कम हुआ तो कुछ भीड़ बढ़ी। दस बजे तक हल्की धूप निकली तो संगम नोज पर भीड़ दिखी। इस समय तक संगम नोज पर करीब एक लाख से अधिक लोग स्नान कर चुके थे। धूप निकलने के बाद शहर के लोग भी स्नान करने निकले। वहीं दूर दराज से बसों और अन्य साधनों से आने वाले श्रद्धालु संगम पहुंचने। शाम तक स्नान ध्यान जारी रहा।

पहले ठंड से बचे और फिर पहुंचे स्नान करने

स्नान पर्व के दिन ठंड भी कहर बरपा रही है। ठंड के चलते श्रद्धालु आगे बढऩे को हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। जौनपुर से रात में ही आए मनोहर लाल और शिव मूरत हनुमान मंदिर के निकट सुबह तक आग तापते रहे। सुबह करीब नौ बजे कोहरा कुछ कम हुआ तो वह स्नान करने गए। ऐसे ही सोरांव से भोर में अपने बेटे के साथ संगम स्नान के लिए बाइक से निकले श्याम लाल कोहरे के चलते घंटे भर के रास्ते को तीन घंटे में पूरा किया। फिर मेला में प्रवेश द्वार पर बाइक रोक दी गई। यहां से संगम तक पैदल चले तो ठंड का असर कुछ कम हुआ और स्नान किया। ऐसे ही बस से गोंडा से आए श्रद्धालु मेला क्षेत्र में पहले आग तापते रहे। जब ठंड कुछ कई तो स्नान किया।

मास्क न सैनिटाइजर

मेला क्षेत्र में कोविड-19 का पालन कुछ लोग ही कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था में लगे अधिकारियों कर्मचारियों को छोड़ दिया तो अन्य न तो मास्क लगाए थे और न ही सैनिटाइजर का प्रयोग कर रहे थे। लेकिन इतना जरूर था कोहरे के धुंध के चलते भीड़ कम हुई और घाटों पर स्वत: फिजिकल डिस्टेंस के हालात बने थे।

Edited By: Ankur Tripathi