प्रयागराज, जेएनएन। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मकसद से केंद्र सरकार ने मुद्रा योजना शुरू की है। हालांकि इस योजना के तहत तमाम युवाओं को आसानी से लोन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसमें बैंकों की अपनी शर्तें आड़े आ रही हैं। किसी को मुद्रा लोन लेना है तो उसे अन्य दस्तावेजों के साथ बैलेंस सीट भी लगानी पड़ेगी। बैलेंस सीट के बगैर लोन नहीं मिलेगा। अब सवाल यह है कि जो युवक पहली बार रोजगार के लिए लोन लेने को आवेदन करेंगे, वह बैलेंस सीट कहां से मुहैया कराएंगे।

आयकर रिटर्न फाइल करने वालों से भी बैलेंस सीट मांगी जा रही

दरअसल, मुद्रा योजना में तीन तरह के ऋण का प्रावधान है। शिशु में 50 हजार, किशोर में पांच लाख और तरुण में 10 लाख रुपये तक ऋण मिलता है, लेकिन लोन लेने के लिए बैंक बैलेंस सीट मांग रहे हैं। बैलेंस सीट न उपलब्ध करा पाने पर लोन के आवेदन निरस्त कर दिए जा रहे हैं। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 44 एई के तहत रिटर्न फाइल करने वालों से भी बैलेंस सीट मांगी जा रही है। हालांकि जो करदाता इस धारा के तहत रिटर्न फाइल करता है तो उसे इसकी अनिवार्यता नहीं है। अगर लोन लेने के लिए बैलेंस सीट दे भी दी जाती है तो वह आयकर के नियमों का उल्लंघन करता है।

आयकर विभाग उसके खिलाफ नोटिस भेजकर दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है।

बोले कर एवं वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल

बता दें कि बैलेंस सीट में किसी कारोबार का एक साल में कितना आय-व्यय एवं अन्य सभी प्रकार के खर्च का ब्योरा होता है। कर एवं वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल का कहना है कि बैंकों को आवेदक का आधार कार्ड और पृष्ठभूमि की जांच करनी चाहिए। बैलेंस सीट दो करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार करने वाले ही दे पाएंगे। युवाओं से बैलेंस सीट मांगने से वह हतोत्साहित हो रहे हैं।

बोले जिला अग्रणी प्रबंधक

इस संबंध में जिला अग्रणी प्रबंधक ओएन सिंह कहते हैं कि शिशु और किशोर में प्रोजेक्टेड बैलेंस सीट की आवश्यकता नहीं है, लेकिन तरुण में लोन के लिए प्रोजेक्टेड बैलेंस सीट जरूरी है। इसमें अनुमानित विवरण भरना होगा कि पैसे का नियोजन कैसे करेंगे और साल भर में कितना लाभ कमाएंगे।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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