जासं, इलाहाबाद : वर्तमान समय में विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जितना भी विकास हुआ है उसमें दास्तानों का विशेष योगदान है। दास्तानों से हमें एक दूसरे देशों की संस्कृति और सभ्यता के बारे में पता चलता है। यह बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता प्रो. मुजाबिर हुसैन रिजवी ने कहीं। वे प्रो. एहतशाम हुसैन स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दास्तानें हमें नई नई बातें सोचना सिखाती हैं। उन्होंने साहित्य की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि पूर्व अपर महाधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी ने प्रो. एहतशाम हुसैन और उनके जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कहाकि एहतशाम हुसैन में धैर्य और सहनशीलता कूट कूटकर भरी हुई थी। वे बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना सहजता से करते थे। विशेष अतिथि के रूप में अरबी फारसी विभाग की अध्यक्ष डॉ. सालेहा रशीद ने अपने संबोधन में कहा कि दास्तानों को पढ़ने के बाद कठिनाइयों से लड़ने का साहस प्राप्त होता है। दास्तानगोई के माध्यम से कई रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। व्याख्यान की अध्यक्षता उर्दू विभाग की अध्यक्ष प्रो. शबनम हमीद ने किया। उन्होंने कहा कि उर्दू साहित्य में एहतशाम हुसैन के साहित्य और समाज के रिश्ते पर उनके लेख और उनका दर्शन आज भी छात्रों के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।

By Jagran