प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रयागराज पुलिस की कार्यशैली पर यूं ही सवाल नहीं उठ रहे हैं। कभी पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार के आरोप में घिरते हैं तो कभी बड़े मामले में आरोपितों को बचाने के आरोप लगते हैं। ऐसा नहीं है कि सुपरविजन करने वाले अधिकारी मातहतों की हरकतों और उनकी कार्यशैली से अनजान हैं। हालांकि उनकी हीलाहवाली ही खाकी की छवि को धूमिल करने के लिए काफी है। ऐसा ही कुछ सवाल अब भाजपा नेता अवधेश मौर्या को गोली मारने की घटना के बाद उठ रहे हैं।

पुलिस ने कार्रवाई की होती तो जानलेवा हमला न होता

पीड़ित परिवार का आरोप है कि अगर झूंसी पुलिस पहले चेत जाती तो शायद घटना न होती। अवधेश के चाचा का आरोप है बीते माह उनका भतीजा चाय पीने जा रहा था। तभी सईद अहमद उर्फ हाफिज ने कार से टक्कर मारी थी। विरोध पर अवधेश की पिटाई की गई थी। फोन करके विपक्षियों ने बब्बू को बुला लिया था, जिसने गाली-गलौज करते हुए गोली मारने की धमकी दी थी। उस मामले में शिकायत दी गई थी लेकिन पुलिस उनकी तरफ से कार्रवाई करने के बजाय बब्बू के साथी अजय भारतीया की तहरीर पर मुकदमा कायम किया था। झूंसी पुलिस ने ऐसा क्यों और किन परिस्थितियों में किया था, इसका जवाब नहीं मिल रहा है। हालांकि घरवालों का कहना है कि पुलिस अगर पहले दी गई तहरीर को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कार्रवाई की होती तो उस पर जानलेवा हमला न होता।

एक भी आरोपित पकड़ा नहीं जा सका

भाजपा नेता अवधेश मौर्या को गोली मारने के मामले में झूंसी पुलिस ने पूर्व प्रधान अख्तर उर्फ बब्बू, इरफान व साबिर के खिलाफ मुकदमा कायम किया है। पुलिस ने अवधेश के पिता सुभाष की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है, लेकिन अब तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं कर सकी। इससे पीड़ित परिवार और ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस विपक्षियों से मिली है। इसके चलते ठोस कार्रवाई करने में हीलाहवाली कर रही है।

Edited By: Brijesh Srivastava