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Atiq Ahmed: अतीक अहमद के 10 बड़े कांड, हिंदुओं के मकानों को गिराने का सुनाया था फरमान

25 जनवरी 2005 को विधायक राजू पाल की हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को माफिया अतीक अहमद ने केस से हटने की धमकी दी। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कराकर करबला स्थित कार्यालय पर पिटाई की।

By Jagran NewsEdited By: Narender SanwariyaPublished: Thu, 30 Mar 2023 04:37 AM (IST)Updated: Thu, 30 Mar 2023 04:37 AM (IST)
Atiq Ahmed: अतीक अहमद के 10 बड़े कांड, हिंदुओं के मकानों को गिराने का सुनाया था फरमान

प्रयागराज, शरद द्विवेदी। उमेश पाल अपहरण कांड में आजीवन कारावास की सजा पाने वाला माफिया से नेता बना अतीक अहमद कभी खुद को ‘पुलिस, कोर्ट व कचहरी से ऊपर समझता था। सपा शासनकाल में उसकी हनक बढ़ जाती थी। पुलिस-प्रशासन उसके समक्ष नतमस्तक रहते थे। अतीक ने एक बार दर्जनभर से अधिक हिंदुओं के मकान को गिराने का फरमान सुना दिया था। मकान को बचाने के लिए संसद में आवाज उठानी पड़ी थी। मामला फरवरी-मार्च 2015 का है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। अतीक ने कसारी-मसारी मुहल्ले में रहने वाले हिंदुओं को घर छोड़ने का निर्देश दे दिया।

तर्क था कि हिंदुओं ने कब्रिस्तान की जमीन पर मकान बनवाया है। दर्जनभर से अधिक हिंदुओं के मकान में लाल निशान लगवाकर उसे गिराने की तैयारी शुरू कर दी। मकान मालिक पुलिस के पास गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। तब भाजपा पार्षद व मौजूदा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू किया गया। गणेश ने नगर निगम की बैठक में मामले को उठाया।

वहीं, फूलपुर से तत्कालीन सांसद व मौजूदा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संसद में आवाज मुखर की। उन्होंने माफिया अतीक की मनमानी व पुलिस-प्रशासन के निष्क्रिय रवैए को पुरजोर तरीके से उठाकर हिंदुओं के हित में लड़ाई लड़ने की बात कही। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। प्रशासन ने जांच करवाया तो जमीन इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (अब प्रयागराज विकास प्राधिकरण) की निकली।

चांद बाबा के कत्ल से बढ़ गया था माफिया का दबदबा

वर्ष 1979 में चकिया में रहने वाले फिरोज तांगे वाले का बेटा अतीक अहमद हाईस्कूल में फेल हो गया था। उसी वर्ष उसके खिलाफ हत्या का एक केस दर्ज हुआ था। हत्या के आरोप ने इतना कुख्यात कर दिया कि उसकी रंगदारी चलने लगी। उस दौर में चकिया में शौक इलाही उर्फ चांद बाबा का सिक्का चलता था। पुलिस भी चांद बाबा के दहशत में रहती थी। चांद बाबा का वर्चस्व खत्म करने के लिए पुलिस ने अतीक के ऊपर हाथ रख दिया। वर्ष 1989 में अतीक शहर पश्चिमी से निर्दलीय प्रत्याशी बना और चांद बाबा को 16625 मतों हरा दिया। अतीक को 25906 वोट पाकर चुनाव जीत गया। इसके बाद उसने अपनी हनक बढ़ाने के लिए चांद बाबा की चकिया में गोली-बम से सरेआम हमला कराकर हत्या करा दी।

पार्षद अशफाक कुन्नू हत्याकांड

पार्षद (तब सभासद) अशफाक कुन्नू का 1994 में कत्ल करा दिया गया था। उस हत्याकांड में भी अतीक और अशरफ का ही नाम आया था लेकिन तब अतीक का ऐसा दबदबा था कि उस पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया था। कोई पुलिस अधिकारी अतीक पर हाथ नहीं डालना चाहता था। 1999 में तत्कीलन एसपी सिटी लालजी शुक्ला ने भाजपा शासन में अशफाक कुन्नू हत्याकांड में अशरफ की गिरफ्तारी की थी।

अशोक साहू हत्याकांड

वर्ष 1996 में व्यवसायी अशोक साहू हत्याकांड अत्यंत चर्चित था। प्रयागराज के सिविल लाइंस में अतीक अहमद के भाई अशरफ ने उसे मारा था। इस मामले में अतीक व उसके पिता जेल गए थे, लेकिन अशरफ को बचाने के लिए उसे घटना से दो घंटे पहले चंदौली में एक थानेदार ने तमंचा के साथ गिरफ्तार दिखा दिया था। इसके जरिए दिखाने का प्रयास हुआ था कि अशरफ गिरफ्तार है तो किसी का कत्ल कैसे कर सकता है? थानेदार अतीक की विरादरी का चकिया निवासी था।

दिनदहाड़े विधायक राजू पाल पर बरसाई गईं थी गोलियां

25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी से बसपा विधायक राजू पाल की दिन दहाड़े हत्या हुई थी। इसमें अतीक की शह पर उसके भाई अशरफ पर राजू पाल को गोली मारने का आरोप है। हत्या के बाद प्रयागराज में कई दिनों तक बवाल चला था। यह हत्याकांड देश भर में चर्चित रहा। 18 साल बाद भी इस मुकदमे में फैसला आना बाकी है। सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस घटना की जांच के बाद 10 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

देवरिया जेल कांड

23 दिसंबर 2018 को अतीक देवरिया जेल में बंद था। उसके इशारे पर बिल्डर मोहित जायसवाल को लखनऊ से देवरिया जेल लाकर मारपीट की गई। साथ ही उसकी 45 करोड़ की संपत्ति हथियाने के लिए स्टांप पेपर पर में जबरन हस्ताक्षर करवाया गया। मामला उभरने पर शासन ने जेल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसी मुकदमे में अतीक के सबसे बडे बेटे उमर के खिलाफ मुकदमा लिखा गया और वह दो लाख रुपये का इनामी घोषित कर दिया गया था।

अपने घर के सामने भाजपा नेता अशरफ को मारा

वर्ष 2003 में अतीक अहमद ने चकिया में अपने घर के सामने रहने वाले भाजपा नेता अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद अतीक के गुर्गे शव लेकर भाग गए थे। अशरफ से अतीक को चिढ़ थी कि उसका नाम उसके छोटे भाई पर है लेकिन भाजपा से जुड़कर उसे चुनौती देता है।

चकिया कार्यालय के सामने पार्षद नस्सन को उड़ाया

नस्सन कभी अतीक का करीबी थी लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि अतीक का धुरविरोधी हो गया। जिससे अतीक की तल्खी हो जाती थी उसका जीना कठिन होना तय था। यही नस्सन के साथ भी हुआ। उसे 2001 में अतीक ने अपने चकिया कार्यालय के सामने गोलियों से छलनी कर दिया था।

लखनऊ गेस्ट हाउस कांड

दो जून 1995 को प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी। बसपा गठबंधन तोड़ने के लिए स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थी। तभी सपा के विधायक और समर्थक वहां पहुंचकर मारपीट करने लगे। मायावती के साथ बदसलूकी की। इसमें अतीक अहमद की अहम भूमिका सामने आई। उसी कांड के बाद मायावती ने अतीक से निजी रंजिश मान ली थी और उनके शासन में अतीक पर सख्त एक्शन होता रहा।

उमेश पाल हत्याकांड

25 जनवरी 2005 को विधायक राजू पाल की हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को माफिया अतीक अहमद ने केस से हटने की धमकी दी। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कराकर करबला स्थित कार्यालय पर पिटाई की। अपने पक्ष में हलफनामा लिखवा लिया। अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही दे दी थी। वर्ष 2007 में बसपा सरकार बनी तो हालात बदलने पर उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले की उमेश पैरवी करते रहे। उनकी 24 फरवरी 2023 को घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसमें उमेश के दो गनर भी मारे गए। हत्याकांड की साजिश अतीक ने जेल से रची थी। गोली चलाने वालों में उसका बेटा भी शामिल था।

शुआट्स में किया था जमकर उत्पात

अतीक अहमद अपनी गुंडागर्दी की वजह से कुख्यात रहा है। 2017 में सपा शासन में अतीक अहमद अपने एक करीबी के बेटे को परीक्षा में नकल के आरोप में निष्कासित करने पर इस कदर गुस्से से उफनाया कि कई गाड़ियों में गुर्गों को लेकर शुआट्स पहुंचा और जमकर उत्पात किया था। वहां कर्मचारियों और शिक्षकों को मारा-पीटा और धमकाया। बाद में उसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया और पुलिस ने आखिरकार बयान के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया।


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