प्रयागराज, जेएनएन। महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपित आनंद गिरि का दर्द अदालत में  छलक पड़ा। सीजेएम कोर्ट में उसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश करने की कोशिश हुई, लेकिन लिंक नहीं जुड़ सका। तब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्र नाथ ने मोबाइल से वीडियो काल पर पेशी की इजाजत दी। वीडियो काल लगने के बाद कार्रवाई शुरू हुई तो मोबाइल से आवाज आई...हेलो, हेलो सर मैं आनंद गिरि बोल रहा हूं। न्यायाधीश को देखते ही वह बोला... आप तो न्याय की मूर्ति हैं, आपके होते हुए मेरे साथ अन्याय हो रहा है। मैं दो माह से ज्यादा समय से जेल में बंद हूं। मैंने सीबीआइ की चार्जशीट पढ़ ली है। सीबीआइ द्वारा गलत तरीके से साक्ष्य को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। मैं निर्दोष हूं। मेरे अधिवक्ताओं को जेल प्रशासन द्वारा मुझसे मिलने नहीं दिया जा रहा है।

बोला आनंद...कृपया अधिवक्ताओं से तो मिलने दिया जाए

मोबाइल से वीडियो काल पर पेशी के दौरान आनंद गिरि ने मिन्नत की... कृपा करके अधिवक्ताओं से मेरी मुलाकात करवा दीजिए। तब मजिस्ट्रेट ने कहा कि मिलने की अर्जी इस न्यायालय में किसी अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई है। अब मामला सत्र न्यायालय द्वारा परीक्षणीय है। जब आपके ऊपर आरोप तय होगा तब आपको अपनी बात रखने का मौका सत्र न्यायालय द्वारा दिया जाएगा। इस दौरान आनंद गिरि की ओर से नियुक्त अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव, विजय द्विवेदी और सुनील पांडेय कोर्ट में मौजूद रहे।

20 सितंबर की रात पुलिस ने लिया था हिरासत में

कभी योग गुरू के तौर पर विख्यात रहा आनंद गिरि 20 सितंबर को मठ बाघम्बरी गद्दी में महंत आनंद गिरि का शव फंदे से लटका मिलने के बाद रात में पुलिस द्वारा हरिद्वार से हिरासत में लिया गया था। रात भर सहारनपुर में रखने के बाद अगले रोज उसे प्रयागराज पुलिस लाइन में लाकर पूछताछ शुरू की गई थी। फिर 22 सितंबर को उसे अदालत में पेश किया गया जहां से उसे नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया था। तभी दूसरे सह आरोपितों आद्या प्रसाद तिवारी और उसके पुत्र संदीप तिवारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिन्हें जेल भेज दिया गया था। फिर सीबीआइ ने जांच शुरू करते हुए आनंद गिरि को सात दिन के लिए कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।

Edited By: Ankur Tripathi