प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी शहर में उत्पात मचाकर लोगों के लिए मुसीबत बने बंदरों को उपयुक्त जंगल में दो माह के भीतर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। याची का कहना था कि बंदरों से खास एरिया के निवासियों व टूरिस्ट को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इस मसले पर हाई कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत बंदरों को जंगल में शिफ्ट किया जाय। शिफ्टिंग में बंदरों का ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें दिक्कत न हो। ऐसे जंगल में भेजा जाय जहां उनके जीवन के लिए जरूरी वनस्पतियां मौजूद हों।

मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मांगी गई है

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने मां गंगा पक्का महल ट्रस्ट की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता प्रांशु गुप्ता ने बहस की। याची का कहना था कि बंदरों से वाराणसी शहर के लोग परेशान हैं। उन्हें जंगल में शिफ्ट किया जाय। सरकारी वकील ने कहा कि जिला वन अधिकारी ने मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही शिफ्ट किया जायेगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने स्वयं एक्शन लिया है। कार्यवाही दो माह में पूरी की जाय।

पान मसाला डायरेक्टर को राहत नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुर्ले पान मसाला गाजियाबाद के डायरेक्टर कृष्ण मणि शुक्ल के खिलाफ आपराधिक केस में जारी गैर जमानती वारंट से फिलहाल राहत नहीं दी है।

हाई कोर्ट ने सीजेएम गाजियाबाद के आदेश के खिलाफ याचिका पर केन्द्रीय वस्तु एवं सेवाकर विभाग से जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 16 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति उमेश कुमार ने दिया है। याचिका पर टैक्स विभाग के अधिवक्ता आरसी शुक्ल ने प्रतिवाद किया। याची के खिलाफ 118 करोड की टैक्स चोरी के आरोप में आपराधिक केस चल रहा है। कोर्ट ने 9 बार सम्मन जारी किया, हाजिर न होने पर जमानती वारंट जारी किया। फिर भी हाजिर नहीं हुए तो खैर जमानती वारंट जारी किया है जिसकी वैधता को चुनौती दी गई है।

Edited By: Ankur Tripathi