प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बसपा के पूर्व सांसद नरेंद्र कश्यप को अपनी बहू को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में मिली सजा पर रोक लगा दी है। नरेंद्र कश्यप को गाजियाबाद की जिला अदालत ने साढ़े तीन साल कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। पूर्व सांसद की पत्नी देवेंद्री कश्यप को भी अदालत ने इतनी ही सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गयी है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति आरके गौतम ने नरेंद्र कश्यप व उनकी पत्नी की आपराधिक अपील पर दिया है। दोनों पहले ही जमानत पर हैं। आपराधिक अपील पर दाखिल अर्जी में नरेंद्र कश्यप का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याची पर लगाए गए आरोप मनगढ़ंत व बेबुनियाद है। अधीनस्थ न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न, हत्या आदि आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में सजा सुनाई गई है।

बहू की मृत्यु में अपीलार्थी के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं है। ऐसे में निचली अदालत का फैसला सही नहीं है। इसे रद किया जाए। अधिवक्ता का यह भी कहना है कि याची एक राजनीतिक व्यक्ति है। इस सजा की वजह से वह चुनाव नहीं लड़ पा रहा है, उसका राजनीतिक भविष्य बर्बाद हो रहा है। कोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए नरेंद्र कश्यप को सुनाई गई सजा के आदेश पर रोक लगा दी है तथा अपील को सुनवाई के लिए जनवरी 2020 में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

Posted By: Umesh Tiwari

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