प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्रमिक अधिकारों को निलंबित करने की अधिसूचना व संशोधन कानून की वैधता की चुनौती याचिका अर्थहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अधिसूचना सरकार ने वापस ले ली है। ऐसे में याचिका का औचित्य नहीं रह गया है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने यूपी वर्कर्स फ्रंट की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी करके जानकारी मांगी थी। सरकार ने अधिसूचना को वापस लेने की जानकारी दी।

आपको बता दें कि राज्य सरकार के श्रम विभाग ने श्रमिक अधिकारों को निलंबित करने की अधिसूचना जारी की थी। इससे फैक्ट्री मालिकों को लेबर से 12 घंटे काम लेने की अनुमति मिल गई थी। अभी तक आठ घंटे अधिकतम 10 घंटे काम लेने की छूट है। उसे श्रमिकों के जीवन के मूल अधिकारों एवं श्रम कानूनों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गयी थी। कहा गया था कि अधिक मुनाफे के लिए श्रमिकों का शोषण किया जाएगा और उनकी नौकरी की गारंटी नहीं होगी। इस मामले में सरकार के बैकफुट पर आने से याचिका अर्थहीन मानते हुए खारिज कर दी गयी है।

Posted By: Umesh Tiwari

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