कुंभनगर : वासंतिक हिलोर में अखाड़ों की शाही डुबकी लगने के बाद कुंभ का अनौपचारिक समापन हो गया है। वैसे तो महाशिवरात्रि तक कुंभ क्षेत्र में संतों व श्रद्धालुओं का जमघट रहेगा, लेकिन अखाड़ों का डेरा वसंत पंचमी के शाही स्नान के बाद कुंभनगरी प्रयाग से उठने लगा है। प्रयाग से उठकर अखाड़े हरिद्वार में 2021 में लग रहे कुंभ मेला में डेरा जमाने की तैयारी में जुट गए हैं।

 हर अखाड़े के महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, महंतों ने मेला छोडऩा शुरू कर दिया है। रविवार की रात तक कई ने मेला क्षेत्र छोड़ दिया। प्रयाग में नागा संन्यासियों, आचार्य महामंडलेश्वर, मंडलेश्वरों का दर्शन करने के लिए जनता-जनार्दन को 2025 में लगने वाले कुंभ मेला की प्रतीक्षा करनी होगी।

कई मायने में प्रयाग कुंभ रहा ऐतिहासिक

बात प्रयाग कुंभ की करें तो यह कई मायने में ऐतिहासिक रहा। राज्य सरकार ने भव्य कुंभ-दिव्य कुंभ की संकल्पना को साकार करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। प्रयाग का कुंभ कई मायने में खास रहा। कुंभ की शुरुआत में 172 देशों के राजनयिकों ने प्रयाग का भ्रमण करके उसके वैभव को करीब से देखा। वहीं कुंभ मेला आरंभ होने पर अखाड़ों ने अपनी ओर से सार्थक संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किन्नर संन्यासियों का शाही स्नान कराने का अहम निर्णय जूना अखाड़ा ने लिया।

किन्‍नर संन्‍यासियों ने इतिहास रचा

अखाड़ा के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि की पहल से जूना अखाड़ा ने उपेक्षा का शिकार किन्नर संन्यासियों को अपने साथ लेकर सनातन धर्म के क्षेत्र में इतिहास रचा। वहीं महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी, यमुना पुरी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण व संगम को विश्व धरोहर घोषित करने का अभियान चलाया। भ्रूण हत्या के खिलाफ दिगंबर अनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर सरयूदास महात्यागी ने बेटी है तो कल है नामक अभियान चलाया।

1993 से ठप परिक्रमा आरंभ कराई

प्रयाग की धाॢमक-पौराणिक परंपरा को संजोने वाली पंचकोसी परिक्रमा 1993 से ठप थी। परिक्रमा बंद होने से द्वादश माधव सहित प्रयाग के धाॢमक व पौराणिक महत्व से लोग अनजान थे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने परिक्रमा आरंभ कराने में अहम भूमिका निभाई। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने कुंभ शुरू होने से पहले द्वादश माधव मंदिरों की दशा सुधारने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया, फिर द्वादश माधव मंदिरों में शौचालय, पेयजल, विद्युत एवं जाने के लिए प्रकाश का प्रबंध हुआ। इधर सात फरवरी को महंत हरि गिरि के नेतृत्व में संतों व प्रशासनिक अधिकारियों ने तीन दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा की। इसके साथ प्रयाग की थाती से देश-विदेश के लोगों को जोडऩे की सार्थक पहल हुई।

कराएंगे छोटी परिक्रमा

पंचकोसी परिक्रमा कराने के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद प्रयाग की छोटी परिक्रमा कराने की तैयारी कर रहा है। महंत हरि गिरि बताते हैं कि पंचकोसी परिक्रमा करना सबके लिए संभव नहीं है। इसकी दूरी अधिक होने के चलते उसमें काफी समय लगता है। इसको देखते हुए काशी, वृंदावन, अयोध्या व मथुरा की तर्ज पर प्रयाग की छोटी परिक्रमा कराई जाएगी। शहर के अंदर स्थित प्रमुख प्राचीन सिद्ध मंदिरों को उसमें शामिल किया जाएगा, जिससे लोग प्रतिदिन सुबह टहलते हुए उन मंदिरों का दर्शन आसानी से करके पुण्य अॢजत कर सकें।

 

Posted By: Brijesh Srivastava