प्रयागराज, जेएनएन। कोविड टेस्ट रिपोर्ट आने में अब कई-कई दिन लग रहे हैं और बिना आरटीपीसीआर के निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती करने में हीलाहवाली कर रहे हैं। यह हाल तब है, जब शासन भी इसे संज्ञान में लेते हुए कह चुका है कि किसी को तकलीफ है और उसकी कोविड जांच रिपोर्ट नहीं आ सकी है तो अस्पताल भर्ती करने से इन्कार नहीं कर सकता है। इसकी शिकायत करने का बस एक जरिया है, कोरोना कंट्रोल रूम। लेकिन उसमें अधिक व्यस्तता के चलते किसी की सुनवाई नहीं हो रही है।

शासनादेश है कि रिपोर्ट नहीं तब भी करें गंभीर रोगियों को भर्ती

भावापुर करेली निवासी 72 वर्षीय परशुराम गुप्ता की जान एंबुलेंस में ही चली गई। स्वजन 17 अप्रैल की रात दो घंटे तक उन्हें लेकर निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। परशुराम को पैरालिसिस होने से तकलीफ थी लेकिन, कोरोना जांच रिपोर्ट नहीं आई थी। इसी तरह से घूरपुर निवासी प्रेमा देवी को लेकर स्वजन बुधवार रात चार निजी अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद सिविल लाइंस में खड़े कोई जुगाड़ तलाशते रहे। उनकी भी कोविड रिपोर्ट चार दिनों में नहीं आ सकी थी और अस्पताल भर्ती नहीं कर रहे थे। यह दो केस बताते हैं कि निजी अस्पतालों का क्या रवैया है। कुछ ऐेसे भी मामले हैं जिनमें एक अस्पताल ने मरीज को अपने यहां से डिस्चार्ज कर दिया और दूसरे अस्पताल में उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा है।


एक सप्ताह में भी नहीं आ रही रिपोर्ट
कोरोना जांच का हाल यह है कि सैंपल देने के एक सप्ताह बाद भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो रही है। ऐसे में किसी की तकलीफ बढ़ जाए और उसके पास कोविड रिपोर्ट भी न हो तो उसका भगवान ही मालिक है।

नहीं कर सकते इन्कार, करना होगा भर्ती
कोविड-19 के नोडल अफसर डा. ऋषि सहाय का कहना है कि एक सप्ताह पहले शासनादेश जारी हो गया है कि कोविड के संभावित मरीज, जांच रिपोर्ट प्राप्त न होने की दशा में भी भर्ती किए जाएंगे। रिपोर्ट में यदि सैंपल कोविड निगेटिव भी आए और मरीज को दिक्कत बढ़ रही है तो अस्पताल को भर्ती करना होगा। कहा कि ऐसे मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हो भी रहे हैं। भर्ती से इन्कार की अभी तक शिकायत नहीं मिली है।
 

जांच रिपोर्ट अपलोड नहीं, कार्यालय से मांगा जा रहा प्रमाण
कोरोना जांच कराने पर संक्रमण की पुष्टि होने के बाद लोग खुद को घर पर आइसोलेट कर रहे हैं। लेकिन, जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट न होने से दिक्कत हो रही है। कर्मचारियों से कार्यालय में जांच रिपोर्ट मांगी जाती है घर पर रहने की अनुमति तभी मिलती है।  प्रयागराज जंक्शन पर कोविड टेस्ट कराया जा रहा है। ऐसे में परेशानी महसूस होने पर रेलवे व प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी भी यहां जांच कराते हैं। पाजिटिव मिलने पर सतर्कता बरतते हुए आइसोलेट हो जाते हैं। लेकिन, हफ्तेभर बाद रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट की जा रही है। प्राइवेट जॉब करने वालों से कंपनी के एचआर रिपोर्ट भेजने का दबाव बनाते हैं। वहीं, सरकारी कर्मचारियों से भी जांच रिपोर्ट की छायाप्रति मांगी जाती है। 19 अप्रैल को कोविड टेस्ट कराने वाले रेलवे के एस एंड टी विभाग के कर्मचारी की रिपोर्ट अभी तक अपलोड नहीं की जा सकी। वहीं, कोरांव के सरकारी विद्यालय के शिक्षक की चार दिन बाद भी रिपोर्ट अपलोड नहीं की गई। निजी कंपनी में काम करने वाले शख्स को कंपनी एचआर का कई बार फोन आ चुका है। एचआर का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।