प्रयागराज, जेएनएन। ब्रिटिश शासन काल में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में उच्च शिक्षा के लिए म्योर सेंट्रल कॉलेज की स्थापना तत्कालीन संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गर्वनर रहे विलियम म्योर ने 1872 में की थी जो आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना का पथ प्रदर्शक बना। उत्तर भारत में उच्च शिक्षा के केंद्र रहे इस कालेज की आधारशिला तत्कालीन भारत के गर्वनर जनरल रहे लार्ड नाथब्रुक ने रखी थी।

विलियम म्योर ने जताई थी स्वतंत्र महाविद्यालय की इच्छा

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गर्वनर रहे सर विलियम म्योर ने तत्कालीन इलाहाबाद में उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय और एक विश्वविद्यालय खोले जाने की इच्छा जताई थी। यह विचार उन्हें 24 मई 1867 में कौंधा था जिसके बाद यहां पर 1869 में एक महाविद्यालय खोलने की योजना तैयार की गई थी।

वायसराय लार्ड डफरिन ने किया था औपचारिक उद्घाटन

कालेज खोलने की योजना बनने के बाद नौ दिसंबर 1873 को म्योर सेंट्रल कालेज के नाम से बनने वाले कालेज की नींव तत्कालीन गर्वनर जनरल लार्ड नार्थब्रुक ने रखी थी। कालेज का भवन बनने में 12 वर्ष लगे थे। औपचारिक उद्घाटन 8 अप्रैल 1886 को वायसराय लार्ड डफरिन ने की थी।

इविवि एक्ट लागू होने पर स्वतंत्र अस्तित्व हो गया था खत्म

1921 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय एक्ट लागू होने पर म्योर सेंट्रल कालेज का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया था जिसके बाद वर्ष 1922 को म्योर सेंट्रल कालेज को इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। विलियम एमर्सन द्वारा कालेज भवन की डिजाइन तैयार की गई थी जिसमें मिस्र, इंग्लैंड और भारत की वास्तुकला दिखती है।

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