अलीगढ़ (जेएनएन) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) छात्रसंघ चुनाव में पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना कोई मुद्दा नहीं हैैं। नामांकन के बाद चुनावी सरगर्मियां तेज हो चली हैैं। पर, जिस यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगी है, वहां आने वाले छात्र नेता कुरेदने पर यही कहते हैैं कि जिन्ना हमारे लिए कभी मुद्दा नहीं रहे। इसे भाजपा ने सियासी लाभ के लिए उछाला। कुछ नेता कहते हैैं कि जिन्ना आस्था का नहीं, बल्कि इतिहास का विषय हैैं।

तस्वीर हटाने को सांसद लिख चुके हैं फोन
यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर 1938 से है। इसे लेकर दो बार बखेड़ा हो चुका है। छात्र संघ की मानद सदस्यता पाने वाले जिन्ना समेत 30 से ज्यादा हस्तियों की यहां तस्वीरें हैैं। भाजपा सांसद व यूनिवर्सिटी की शीर्ष नीति-नियामक संस्था ' एएमयू कोर्ट ' के सदस्य सतीश गौतम ने कुलपति को तीन बार पत्र लिखकर तस्वीर हटाने की मांग की। दो मई-18 को तो इतना बवाल बढ़ा कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी छात्र संघ की मानद सदस्यता लिए बिना ही लौटना पड़ा।

इंतजामिया ने झाड़ लिया था पल्ला
इंतजामिया यह कहकर मामले से दूरी बनाए रही कि तस्वीर हटाने या बनाए रखने का निर्णय यूनियन करेगी। पर, दो अक्टूबर को जब गांधी जयंती पर प्रदर्शनी में बापू-संग जिन्ना की तस्वीर भी लग गई तो इस गुनाह के लिए लाइब्रेरियन डॉ. अमजद अली ने माफी मांगनी पड़ी।

फाइनल स्पीच पर नजर
जिन्ना का जिक्र आने पर छात्र नेता भाजपाइयों व ङ्क्षहदूवादियों को कोसते हैैं। अब सबकी निगाहें एक नवंबर को होने जा रही छात्रों की फाइनल स्पीच पर हैैं। तीन नवंबर को मतदान व मतगणना होगी। एक को ही छात्र नेता अपने मुद्दे खोलेंगे। बीते वर्षों की स्पीच में छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को उठाते हुए इंतजामिया को भी खूब निशाने पर रखा है।

जिन्ना में नहीं है आस्था
छात्रनेता यासीन गाजी का कहना है कि  जिन्ना को लेकर नेशनल पॉलिसी बननी चाहिए। इसे मुद्दा तो संघ व भाजपा ने बनाया है। आज जिन्ना आस्था नहीं, इतिहास का विषय हैैं।

जिन्ना को लेकर न बने मुद्दा
छात्रनेता ललित प्रताप सिंह का कहना है कि एएमयू में ङ्क्षहदू-मुस्लिम सभी पढ़ते हैैं। जिन्ना को लेकर कोई मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। नफरत की सियासत से एएमयू को दूर ही रखें।