अलीगढ़, जेएनएन।  ‘आंसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा, जहां प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा।’ जी हां, ये पक्तियां प्रसिद्ध गीतकार व महाकवि गोपाल दास नीरज ने अपनी जीवित रहते हुए लिखी और सच ही लिखीं। कविता में जब भी प्रेम और सौंदर्य, दर्द और घुटन और अध्यात्म और दर्शन की बात होती है तो नीरज की ये भावनाएं साफ परिलक्षित हो जाती हैं। नीरज ने अपने गीतों के माध्यम से न केवल गीत विधा को पुनस्र्थापित किया, बल्कि उसे ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनकी महारत न केवल गीतों में थी, बल्कि गजल, हाइकू, दोहा व गद्य में भी खूब अपनी बात कही। वे हिंदी के सिद्ध कवि थे तो उर्दू के मुकाबिल शायर भी। सरस भाषा में रहस्यमयी बात की। 19 जुलाई 2018 को काव्य जगत के सिद्ध पुरुष नीरज इस दुनिया को अलविदा कह गए। अफसोस, उनकी यादों को संजोने के लिए जो कार्य होने थे, वे नहीं हो पाए।

गीतोंं और कविताओं से हासिल की लोकप्रियता 

गोपालदास नीरज, जिन्होंने अपने गीतों और कविता से जो लोकप्रियता हासिल की, शायद ही किसी दूसरे कवि को मिली। अफसोस की बात ये है कि उनके जीवित रहते या मरणोपरांत कोई स्मारिका या ग्रंथ नहीं निकल पाई। जनकपुरी स्थित वह आवास, जहां वे अंतिम समय तक रहे, उसे संग्रहालय बनाने की बात हुई, वह भी नहीं हुआ। उनसे जुड़े रहे लोगों ने स्मारक बनाने की बात भी कही, जिसमें नीरज की किताबें व उनसे जुड़ा सामान रखा जाता। यह योजना भी एक कदम नहीं बढ़ पाई। उनकी याद में साहित्य अकादमी बनाने का वायदा भी धुंधला पड़ गया है। नीरज, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए 1970, 1971 व 1972 में लगातार फिल्म फेयर अवार्ड मिले। यशभारती, विश्व उर्दू परिषद पुरस्कार, पद्मश्री, पद्मभूषण जैसे सम्मान मिले। 2015 में 21 लाख रुपये का प्रतिष्ठित साहित्य शिरोमणि सम्मान भी मिला। पूरे देश ने नीरज की प्रतिभा को सराहा और नमन किया, मगर अपने ही शहर में मरणोपरांत उनकी यादों को जीवंत रखने के लिए कुछ नहीं किया गया। नीरज की पुण्यतिथि पर इस बार कोई पहल हो, ऐसा कौन नहीं चाहेगा।

गोसेवा करके नीरज को श्रद्धांजलि

अखिल भारतीय महिला कायस्थ महासभा की अोर से नीरज की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर राधा रमण गोशाला में गो सेवा कर के उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शुभारंभ चेयरपर्सन अनीता जौहरी व सचिव सरिता माथुर ने नीरज के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्जलित कर किया। सुनीता सक्सेना ने नीरज के प्रसिद्ध गीत-कारवां गुजर गया.., गाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। अमिता सक्सेना ने उनके जीवन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। सभी सदस्यों ने गाय व अन्य गोवंशों को पालक, केले, आटा, गुड़ और हरा चारा खिलाया। गोशाला को 51 सौ रुपये की राशि दान दी। कोषाध्यक्ष शुभ्रा रायजादा ने आभार व्यक्त किया।

महफिलें कर रहीं इंतजार नीरज का

वरिष्ठ कवि अशोक अंजुम का कहना है कि नीरज ने गीत को जो ऊंचाइयां दीं, निश्चित रूप से अभिनंदनीय हैं। उन्होंने अपने गीत-गजलों से विश्व भर में अलीगढ़ को पहचान दी। उनकी कमी उम्र-भर खलती रहेगी, लेकिन अपनी रचनाधर्मिता से सदियों-सदियों तक लोगों के हृदय में जीवित रहेंगे। अंजुम ने कहा-

‘कौन छू पाएगा जो है वक़ार नीरज का,

कोई सानी नहीं है गीतकार नीरज का।

जब तलक सृष्टि है तब ही गीत महकेंगे,

गीतऋषियों मेंं रहेगा शुमार नीरज का।

काश आ जाएं कहीं से औ'''' झूमकर गाएं,

महफ़िलें कर रही हैं इंतज़ार नीरज का।

प्यार को बाँटना, इन्सां को बनाना इन्,सां

सच कहूं बस यही था रोजगार नीरज का।

ऐसे रच-बस गए हैं गीत सभी के दिल में,

कहां मुमकिन है कि उतरे खुमार नीरज का।’

Edited By: Anil Kushwaha