अलीगढ़ (जेएनएन) : नोटबंदी के वो दिन आपको याद है न, जब लोगों को अपने ही पैसों के लिए कतारों में दिन-रात लगना पड़ा था। आज तीन साल बाद आप जरूर नोटबंदी को भूल गए हों, लेकिन शहर का एक शख्स उस दौर की परेशानी को अब तक झेल रहा है। नोटबंदी में 2500 के पुराने नोटों के बदले मिले एक-एक रुपये के छोटे सिक्कों में से 300 बाजार में चल सके। बाकी 2200 को न तो बाजार में कोई ले रहा है, न ही बैंक लेने को तैयार हैं।

नोटबंदी के समय बदले थे रुपये

शनिवार को बोरे में सिक्के भरकर एसएसपी दफ्तर पहुंचे मोनू कुमार पुत्र मंगल सिंह निवासी चूहरपुर आइटीआइ रोड ने बताया कि नवंबर 2016 में जब एक हजार व 500 रुपये के नोट प्रचलन से बाहर हो गए थे, तब मां रामवती ने इंडस्ट्रियल एरिया स्थित भारतीय स्टेट बैैंक की शाखा से 2500 रुपये करेंसी बदलवाई थी। बदले में बैंक ने 2500 रुपये के एक-एक रुपये के छोटे सिक्के थमा दिए। मजबूरी में उन्हें सिक्के लेने पड़े, लेकिन तब से एक-एक रुपये के सिक्के को खर्च करना मुसीबत बन गया है। तीन साल में 300 सिक्के ही खर्च हो सके हैं। अब तो इन सिक्कों को कोई भी नहीं लेता।

हर दुकान वाले कर देते हैं मना

बाजार में हर दुकान पर मना कर दिया जाता है। बैंक के चक्कर लगाकर भी थक गए। ये कहकर लौटा दिया जाता है कि हम कुछ नहीं कर सकते। थक-हार मोनू शनिवार को एसएसपी दफ्तर शिकायत करने पहुंच गए। एसएसपी से मुलाकात नहीं हो सकी। मोनू ने बाहर ही सिक्के फैला दिए। कहा, जब इन सिक्कों की कीमत ही नहीं है कि तो क्या इन्हें लोहे के भाव बेच दूं?

जांच कराने का मिला आश्वासन

एसपी क्राइम ने मोनू से बैंक में ही जाकर आग्र्रह करने को कहा। इसके बाद वह बैंक पहुंचे, जहां एक सप्ताह का फिर से आश्वासन मिल गया। एसबीआइ के डिप्टी मैनेजर प्रकाश भारती ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच कराएंगे।

खपा दिए गए थे सिक्के

नोटबंदी के दौरान रुपयों की किल्लत पड़ गई थी। लोग पाई-पाई को तरस गए थे। ऐसे में बैंकों ने कई लोगों को भारी संख्या में सिक्के थमा दिए थे, जो सिरदर्द बन गए।

Posted By: Sandeep Saxena

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