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यूपी-हरियाणा सीमा का मिटेगा झगड़ा, यमुना के खादर में लगेंगे पिलर; पांच दशक पुराने विवाद का स्थायी समाधान

Published: Sun, 04 Oct 2026 07:12 PM (IST)

यमुना नदी के बदलते बहाव से उत्पन्न हुए उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच पांच दशक पुराने सीमा विवाद का अब स्थायी समाधान होने जा रहा है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. पांच दशक पुराने यूपी-हरियाणा सीमा विवाद का समाधान।

  2. अलीगढ़-पलवल सीमा पर 136 बाउंड्री पिलर लगेंगे।

  3. सर्वे ऑफ इंडिया की निशानदेही पर होगा यह काम।

सुरजीत पुंढीर, अलीगढ़। यमुना की धारा बदली तो सिर्फ नदी का रास्ता ही नहीं बदला, बल्कि दो राज्यों की सीमाएं उलझ गईं। करीब पांच दशक से उत्तर प्रदेश व हरियाणा के किसानों के बीच चली आ रही इस सीमा की उलझन ने समाधान की राह पकड़ ली है। सीमा विवाद को खत्म करने के लिए अब यमुना के खादर में स्थायी निशान खींचे जाएंगे।

सर्वे ऑफ इंडिया की निशानदेही के आधार पर अलीगढ़-पलवल सीमा पर 136 बाउंड्री पिलर लगाए जाएंगे। अब उत्तर प्रदेश की तरफ से लगाने की तैयारी है। लोक निर्माण विभाग को इसकी जिम्मेदारी मिली है। यमुना में पानी कम होते ही काम पूरा किया जाएगा।

हरियाणा की ओर से ज्यादातर पिलर पहले ही लगाए जा चुके हैं। सीमा निर्धारण और पिलर लगाने पर 6.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें से करीब 56 लाख रुपये शासन से जारी हो चुके है। टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। प्रशासन के अनुसार करीब 10 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच लंबे समय से कवायद चल रही है। एडीएम प्रशासन सौरभ भट्ट ने बताया कि यमुना खादर में सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वे के बाद बाउंड्री पिलर लगाने पर सहमति बनी। अब सीमा सिर्फ नक्शे और अभिलेखों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर भी स्थायी निशान होंगे।

अलीगढ़ के 589 किसान प्रभावित

इस विवाद से टप्पल व हरियाणा के पलवल जिले की होडल तहसील के किसान प्रभावित हैं। उपलब्ध प्रशासनिक विवरण के मुताबिक सीमा विवाद से अलीगढ़ के 589 और हरियाणा के 123 किसान प्रभावित हैं। सीमा स्पष्ट न होने के कारण जमीन पर कब्जे और फसल को लेकर दोनों ओर के किसानों के बीच विवाद की स्थिति बनती रही है। कई बार मामला संघर्ष और फायरिंग तक पहुंच चुका है।

यमुना की धारा बदलने से उपजा विवाद

इस विवाद की जड़ यमुना की बदलती धारा है। दशकों पहले नदी की धारा का रुख बदलने से दोनों तरफ की जमीन की स्थिति बदल गई। विवरण के अनुसार टप्पल क्षेत्र के किसानों की करीब 2,188 एकड़ भूमि हरियाणा की तरफ चली गई। हरियाणा की करीब 1,286 एकड़ जमीन अलीगढ़ की सीमा में आ गई। इसके बाद से ही दोनों राज्यों के किसानों के बीच विवाद बना हुआ है।

इन गांवों पर सबसे ज्यादा असर

हरियाणा के बिलोचपुर, काशीपुर, अतवा, कुशक, थातकोनगर, सुल्तानपुर और मुर्तजाबाद गांव प्रभावित हैं। अलीगढ़ के ललितपुर रईयतपुर, शेरपुर, समस्तपुर, घरबरा, मालव, गिरधरपुर, ऊंटासानी और धारागढ़ी समेत कई गांव इस विवाद से प्रभावित हैं।

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