अलीगढ़ [जेएनएन]: औरेया हादसे के बाद भी पुलिस प्रशासन सड़कों पर पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों को लेकर गंभीर नहीं है। सोमवार को भी जिले के बॉर्डरों में पैदल मजदूरों के आने का सिलसिला बरकरार रहा। सैकड़ों किलोमीटर के सफर में कोई साइकिल से तो कोई रिक्शे से अपने गंतव्य को जाता दिखा। पुलिस ने भी इन्हें रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

खेरेश्वर चौराहे पर बने आश्रय स्थल से सोमवार को करीब दो सौ मजदूरों को चार बसों से रवाना किया गया। दोपहर बाद जो मजदूर आए, उन्हें गाजियाबाद से आईं बसों में ठूंस दिया गया। ये लापरवाही और बेकदरी की हद थी। डग्गेमार वाहनों ने खूब फर्राटा भरा पर पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।

रिक्शा चलाकर गोरखपुर गए तीन युवक

सोमवार दोपहर तीन बजे तीन रिक्शों में सवार गोरखपुर के युवक मिले। तीनों की उम्र 25-30 के बीच थी। तीनों ने अपने नाम रामसर्वेश, विद्या व रामसागर बताए। कहने लगे कि दिल्ली की आजादपुर मंडी में काम करते थे। लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो गया तो घर ही नजर आया। साधन न मिला तो रिक्शा उठाकर चल दिए। तीनों रविवार शाम को चले थे। खेरेश्वर चौराहे पर पुलिस ने इन्हें रोक तो लिया, मगर खाना खिलाने के बाद भूल गई। सो ये तीनों खुद ही रवाना हो गए।

भूखे बच्चे के साथ भटकती मिली महिला

शाम करीब साढ़े चार बजे सारसौल पर एक महिला 10 माह की भूखी बच्ची के साथ भटकती मिली। मानव उपकार संस्था की टीम ने खाने व दूध का इंतजाम किया और दोनों को खेरेश्वर चौराहे पर बने आश्रय स्थल तक छोड़ा। महिला कामिनी को गाजियाबाद के लिए पुलिस ने एक वाहन में बिठाकर रवाना किया।

बिहार को पैदल निकले 26 मजदूर

मडराक : रामघाट में फंसे 26 प्रवासी मजदूर मडराक क्षेत्र के हाईवे पर पैदल ही जा रहे थे। बिहार जाना था। रास्ते में किसी ने नहीं रोका। देवपाल, प्रवीण, विनय, राजू, रामङ्क्षसह, पप्पू ङ्क्षसह समेत 26 मजदूर रामघाट में ट्रकों में बालू भरने का काम करते हैं। कहने लगे कि लॉकडाउन खुलने की आस में रुके रहे, लेकिन अब खाने के भी लाले पड़ गए हैं। रविवार को पैदल ही निकल आए। सोमवार शाम छह बजे मजदूर आगरा हाईवे स्थित गांव पडिय़ावली पर कुछ देर रुके और फिर बढ़ गए।

Posted By: Sandeep Saxena

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