अलीगढ़, जेएनएन : कोरोना एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए लोग फिर योग की ओर मुड़ रहे हैं। लोग पतंजिल जिला योग समिति के पदाधिकारियों से योग सीख रहे हैं। पार्क और घरों में भी लोगों ने योग का अभ्यास शुरू कर दिया है। योग शिक्षकों से भी संपर्क कर रहे हैं, जिससे उनके निर्देशन में योग का अभ्यास कर सकें। पतंजलि जिला योग समिति के पदाधिकारियों से संपर्क करना भी शुरू कर दिया है।

फिर तेजी से पांव पसार रहा कोरोना

कोरोना ने पिछले साल मार्च महीने से तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया था। एक साल से ऊपर का समय हो गया है। एक बार फिर कोरोना पांव पसारने लगा है। पिछले साल कोराेना के फैलने पर तमाम लोग योग से जुड़ गए थे। चूंकि, घरों से निकलना नहीं था, पूरी तरह लाकडाउन था, इसलिए लोग घरों में ही योग अभ्यास करते थे। युवा भारत के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा बताते हैं कि तमाम लोग इंटरनेट मीडिया के माध्यम से योग सिखा करते थे। लाकडाउन में कुछ छूट मिली तो योग शिक्षिकों को घर पर बुलाना शुरू किया जाने लगा। योग शिक्षक सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, पदमासन, कपाल भांति, अनुलोम-विलोम आदि आसन और क्रियाएं बताया करते थे। भूपेंद्र शर्मा का दावा है कि इससे काफी लोगों को राहत मिलेगी, जिससे वह कोरोना के संकट से बाहर आए। एक बार फिर जब कोराेना बढ़ रहा है तो लोग योग की ओर मुड़ रहे हैं। पंतजलि के पदाधिकारियों से संपर्क करके योग के बारे में जानकारी कर रहे हैं। तमाम ऐसे लोग हैं जो इम्युनिटी बढ़ाए जाने की क्रिया के बारे में पूछ रहे हैं। ऐसे समय में कौन सा योग और आसन करें इन सब के बारे में जानकारी कर रहे हैं। भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस समय प्रतिदिन तीन-चार फोन योग शिक्षक के बारे में जानकारी लेने के लिए आ जाते हैं। योग शिक्षक की मांग बढ़ने लगी है। 

जिले में 100 केंद्र चलते हैं

भारत स्वाभिमान के जिला प्रभारी और अधिवक्ता राकेश शर्मा ने बताया कि जिले में योग के 100 केंद्र चलते हैं। पार्क, स्कूल-कालेज, धर्मशाला आदि स्थानों पर यह केंद्र चलाए जाते हैं। राकेश शर्मा ने बताया कि लगातार केंद्र बढ़ाए जाने की मांग आ रही है, मगर इतनी संख्या में योग शिक्षकों का उपलब्ध कराना मुमकिन नहीं होगा। जिला प्रभारी ने कहा कि योग प्राकृतिक चिकित्सा है। हमारे ऋषि-मुनि योग की बदौलत ही 1000 वर्ष तक जीया करते थे। वह कठिन योग के साधक हुआ करते थे। उस समय वातावरण भी शुद्ध था। इसलिए वह स्वास्थ्य भी रहते थे, मगर आज वातावरण तेजी से बदला है। गांव अशुद्ध हुई है, पानी भी दूषित हो गया है। खान-पान दिनचर्या सबकुछ बदल गया है, ऐसे में योग-व्यायाम नहीं करेंगे तो अब अस्वस्थ हो जाएंगे। राकेश शर्मा ने कहा कि कोरोना से लड़ने का योग बहुत बड़ा हथियार है। पिछले साल पूरे देश ने योग को अपनाया। वह कोरोना से तो बचे ही अवसाद से भी बाहर आए। इसलिए योग-आसन के प्रति लोगाें का रुझान बढ़ रहा है।

विदेशियों ने भी माना लोहा

जिला योग समिति प्रभारी हरिओम सूर्यवंशी ने बताया कि योग दुनिया की सबसे प्राचीन प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। योग करने से व्यक्ति स्वस्थ और मस्त रहता है। इसलिए सारी दुनिया ने योग को अपनाया। 21 जून को योग दिवस पर सारी दुनिया योग करती है। हरिआेम सूर्यवंशी ने कहा कि विश्व के लोग किसी भी बात को सहज रुप में स्वीकार नहीं करते हैं। वह पहले उसका वैज्ञानिक आधार देखते हैं, जब उन्हें पूर्णत: पता चल जाता है फिर वह उस चीज को स्वीकार करते हैं। यही स्थिति योग के साथ रही है, पहले योग को उन्होंने नहीं स्वीकारा, मगर जब उन्हें इंटरनेट मीडिया के माध्यम से योग के फायदे के बारे में पता चलने लगा तो धीरे-धीरे दुनिया के तमाम देशों में योग किया जाने लगा।

हर व्यक्ति को करना होगा याेग

युवा भारत के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने दावा किया कि हर व्यक्ति को योग करना होगा। क्योंकि वातावरण तेजी से दूषित हो रहा है। शुद्ध पानी और ताजी हवा लोगों को मिल नहीं रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी हो गई है। ऐसे में लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो रही हैं। लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं। अवसाद की चपेट में आ रहे हैं। योग ही एक माध्यम है जो इन सब चीजों से बचा सकता है। इसलिए नई पीढ़ी को योग की ओर मुड़ना ही पड़ेगा, बशर्ते कुछ दिन बाद जुड़े। क्योंकि हमारे यहां नकल की आदत है। यदि विदेशी योग करने लगेंगे तो हम सहज स्वीकार कर लेंगे, मगर देश का कोई व्यक्त उसी बात को कहे तो हम नहीं मानेंगे। भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि बीमारियों की गिरफ्त में जब आएंगे तो उन्हें मानना ही पड़ेगा।

Edited By: Anil Kushwaha