जासं, अलीगढ़: जिला मुख्यालय से 34 किमी दूर अलीगढ़-मथुरा रोड स्थित कस्बा बेसवा के समीप सर्वमंगला माता (पूठा वाली मैया) विराजमान हैं। अलीगढ़ व मथुरा से यहा सीधे बस से पहुंचा जा सकता है। प्राचीन इतिहास को समेटे इस मंदिर से लोगों की अपार आस्था है। नवरात्र में यहा मेला लगता है। माता की कृपा पूरे क्षेत्र पर रहती है, इसलिए घर परिवार में कोई भी मंगल कार्य बिना मैया के आशीर्वाद के प्रारंभ नहीं होता।

इतिहास

बताया जाता है कि यह मंदिर त्रेतायुग का है। संसार के कल्याण के लिए ऋषि विश्वामित्र ने यज्ञ किया था। उस समय यहा तारिकासुर व कालभीत नामक राक्षस का आतंक था। यज्ञ से पहले विश्वामित्र ने यज्ञ कुंड (धरणीधर सरोवर)के पूर्व दिशा में सर्वमंगला माता की स्थापना की थी। इस स्थान पर पूठा होने के कारण बाद में सर्वमंगला माता का नाम पूठा वाली मैया पड़ गया। पहले यहा मंदिर के स्थान पर कच्चा मठ था, बाद में श्रद्धालुओं ने यहा चबूतरा बना दिया। महंत महेशगिरी ने 1985 के आसपास श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर बनवाया। मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को मेला लगता है और भंडारा होता है।

विशेषता

मंदिर के पास ही पीरबाबा की मजार है। इस मजार पर हिंदू-मुस्लिम सभी आते हैं। नवरात्र में मथुरा, आगरा, दिल्ली, हाथरस, राजस्थान, हरियाणा आदि प्रातों से भी लोग दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि में नौ दिन तक मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है। मनोकामना पूर्ण होने पर लोग पीतल का घटा चढ़ाते हैं। द्वार पर ही घटों की बड़ी श्रृंखला दिखाई देती है। पूरे मंदिर को गेरुआ रंग से रंगा गया है। बाहर विशाल द्वार बना हुआ है।

तैयारिया :नवरात्र के लिए मंदिर पर विशेष तैयारिया की जाती हैं। प्रत्येक दिन शाम को भजन- कीर्तन किया जाता है। मंदिर पर पूठा वाली मैया के साथ हनुमान जी, शिव परिवार, शनिदेव, संतोषी मैया के भी दर्शन होते हैं।

पूठा वाली मैया अपने भक्तों की सच्चे मन से मागी गई हर मुराद पूरी करती हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु पीतल का घटा चढ़ाते हैं। सभी भक्तों पर मैया की अशीम कृपा होती है। बाबा सोमगिरि, महंत।

सर्वमंगला पूठावाली मैया की ख्याति दूर-दराज तक फैली हुई है। नवरात्र में यहा लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ते हैं।

मीरा देवी, भक्त।

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